भारतकोश
शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary

लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा

स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished511 पृष्ठ

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अष्टम पटल } [ १६१ भाल में उन्मीलित लोचन में समन्वित—अपने स्थूल कुचों के भार से समाक्रान्त—निरन्तर मुनिगणों के द्वारा सेव्यमाना वाक् की अधि- देवता आपकी भूति के लिए होवे ।१००। रुद्रलक्षं जपेन्मंत्रं दशांशं जुहुयाद्घृतैः । मातृकाकल्पिते पीठे पूजयेत्तां यथा पुरा ।१०१ पलाशकुसुमैर्हुत्वा परां सिद्धिमवाप्नुयात् । कदम्बकुसुमैस्तद्वत्फलैः श्रीवृक्षसम्भवैः ।१०२ अचराच्छ्रियमाप्नोति वाचां कुन्दसमुद्भवैः । नन्द्यावर्तप्रसूनैर्वा हुत्वा वाग्वल्लभो भवेत् ।१०३ ब्राह्मीरसे स्वकल्काढ्ये कपिलाज्यं पचेज्जपन् । पिबेद्दिनादौ तं नित्यं सर्वशास्त्रार्थविद्भवेत् ।१०४ अनया विद्यया जप्तं ब्राह्मीपत्रञ्चभक्षयेत् । न विस्मरति मेधावी श्रुत्वा वेदागमान्पुनः ।१०५ इस मन्त्र का ग्यारह लाख जप करना चाहिए और जप का दशांश घृत से होम करे। मातृका कल्पित पीठ पर पूर्व की ही भांति उस देवी का अभ्यर्चन करे ।१०१। ढाक के पुष्पों से हवन करके परा सिद्धिकी प्राप्ति किया करता है। उसी के समान कदम्ब के पुष्पों से और श्री वृक्ष के फलों से होम करने पर भी फल हुआ करता है ।१०२। कुन्द से समुत्पन्न अथवा नन्द्यावर्त के पुष्पों से होम करके शीघ्र ही श्री की प्राप्ति किया करता है और वाग्वल्लभ हो जाता है ।१०३। अपने ही कल्क से युक्त ब्राह्मी बूँटी के रस को कपिला गौ के घृत में जप करता हुआ पाचन करे। उसको दिन के आदि में नित्य पीवे तो सब शास्त्रों के अर्थों का ज्ञाता हो जाया करता है ।१०४। इस विद्या से अभिमन्त्रित किए हुए ब्राह्मी बूँटी के पत्रों का भक्षण करे तो मेधावी और वेद आगमों का श्रवण करके कभी भी भूलता नहीं है ।१०५।