भारतकोश
शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary

लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा

स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished511 पृष्ठ

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१६६ ] [ श्री शारदा तिलक बिभ्राणां वरमब्जयुग्ममभयं हस्तैः किरीटोज्ज्वलां क्षौमाबद्धनितम्बबिसितां वन्देऽरविन्दस्थिताम् ।४ भानुलक्षं जपेन्मन्त्रं दीक्षितो विजितेन्द्रियः । श्रियमभ्यर्चयन्नित्यं सुगन्धिकुसुमादिभि १५ तत्सहस्रं प्रजुहुयात्कलशैर्मधुरोक्षितैः । जपान्ते जुहुयान्मन्त्री तिलैर्वा मधुराप्लुतैः ।६ बिल्वै फलैर्वाजुहुयात् त्रिभिर्वा साधकोत्तमः । अत्र सम्यग्यजेत्पीठं नवशक्तिसमन्वितम् ।७ इसके अनन्तर श्रीदेवी के मन्त्रों के विषय में वर्णन करूंगा जो श्री और सौभाग्य के फलों का प्रदान करने वाले हैं। जिस श्रीदेवी के कटाक्ष मात्र से ही तीनों लोक वृद्धि को प्राप्त होते हैं ।१। अब मन्त्र का उद्धार कहा जाता है-वह्नि से समारूढ वान्त हो और वाम नेत्र इन्दु से संयुत होवे-यही श्रीदेवी का बीज कहा गया है जो दूसरी चिन्ता- मणि के ही समान होता है । वान्ता का अर्थश है-वह्नि का अर्थ रेफ होता है-वाम नेत्र ईकार को कहते हैं--इन्दु का तात्पर्य बिन्दु होता है। चिन्तामणि का यह प्रभाव है कि उसके समक्ष में जो भी मन में विचारा जावे वही पूर्ण हो जाता है ।२। इस मन्त्र का ऋषि भृगु है- निचृच्छन्द है और श्री देवता कहा गया है। षट्क्रम से षड् दीर्घ युक्त बीज के द्वारा अङ्गों का कर्म करना चाहिए ।३। अब ध्यान बतलाया जाता है-जो देवी अपनी कान्ति के द्वारा सुवर्ण के सदृश है जो हिमवान् पर्वत के समान परम विशाल कार्य चार गजों के द्वारा सूडों से उत्क्षिप्त सुवर्ण निर्मित और अमृत से भरे हुए कुम्भों से असिच्यमान श्रीदेवी को जो अपने करों से वरदान-दो कमल और अभयदान को धारण करने वाली और किरीट् से पर मोज्ज्वल तथा क्षोम वस्त्र से नितम्ब विम्बों को वाँधकर अतीव शोभित मन से विराजमान है, उस श्री देवी की मैं वन्दना करता हूँ ।४। दीक्षा ग्रहण करके दीक्षित होकर अपनी इन्द्रियों को जीतने वाले को इस मन्त्र का बारह लाख जप करना चाहिए और