शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)
Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary
लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा
स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंअष्टम पटल ] [ १७१ वाग्भव वनिता विष्णोर्माया मकरकेतनः । चतुर्बीजात्मको मन्त्रश्चतुर्वर्गफलप्रदः ॥ अङ्गानि कुर्याद्दीर्घाढ्यचरमाबीजेन मन्त्रवित् ।३० माणिक्यप्रतिमप्रभां हिमनिभैस्तुङ्गै श्चतुर्भिर्गजै- र्हस्ताग्राहितरत्नकुम्भसलिलैरासिच्यमानां मुदा । हस्ताब्जैर्वरदानमम्बुजयुगाभीतीर्दधानां हरेः । कान्तां, कांक्षितपारिजातकलतिकां वन्दे सरोजासनाम् ।३१ भानुलक्षं हविष्याशी जपेदन्ते सरोरुहैः । जुहुयादरुणैः फुल्लै त्तत्सहस्रं जितेन्द्रियः । २ रमायाः कल्पिते पीठे तद्विधानेन पूजयेत् । कुर्यात्प्रयोगांस्तत्रस्थान्मनुना तेन साधकः ।३३ निधिभिः सेव्यते नित्यं मूर्तिमद्भिरुपासितैः । दीर्घा यादिविसर्गान्तो ब्रह्मा भानुर्वसुन्धरां ।३४ वान्ते सिन्यै प्रिया वह्नेर्मनः प्रोक्तौ दशाक्षरः । ऋषिर्दक्षो विराट्छन्दो देवता श्रीः समीरिंता ।३५ देव्यै हृदयामाख्यातं पद्मिन्यै शिर ईरितम् । विष्णुपत्न्यै शिखाप्रोक्ता वरदायै तनुच्छदम् ।३६ वाग्भव-विष्णु भगवान की वनिता-माया-मकरकेतन-यह चार बीजों के स्वरूप वाला मन्त्र चारों वर्गों के अर्थात् धर्म-अर्थ-काम- मोक्ष के फलों का प्रदान करने वाला होता है। मन्त्र का ज्ञाता दीर्घ से संयुत रमा के बीज के द्वारा अङ्गों को करे ।३०। ध्यान एवं वन्दना बतलाते हैं-माणिक्य के समान प्रभावाली-जिनकी सूडों में रत्नों से निर्मित जल से परिपूर्ण कलश है ऐसे हिम (बर्फ) के सदृश चार गजों के द्वारा आनन्द पूर्वक आसिच्यमान है अर्थात् गजों की सूड़ों में स्थित कलशों से अभिषेक की जा रही है-जिसकी भुजाओं में जो कमल समान कर वाली हैं उनमें वरदान पद्मों का जोड़ा और अभयदान धारण किये हुईं हैं। ऐसी भगवान हरि की कान्ता की जो