भारतकोश
शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary

लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा

स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished511 पृष्ठ

पृष्ठ 184, कुल 511 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 184

१८४ ] [ श्री शारदा तिलक प्रसूनैर्जुहुयान्मन्त्री लक्ष्मीवल्लीसमुद्भवैः । नन्द्यावर्तसमुत्थैर्वा सिद्धार्थैश्च घृतप्लुतैः ।१०६ महतीं श्रियमाप्नोति मन्यते सर्वजन्तुभिः । मरीचैर्जीरकोन्मिश्रैर्नारिकेलरसाप्लुतैः ।१०७ सगुडैराज्यसंकपक्कैरपूपैराज्यलोलितैः । जुहुयात्पयसाहारो मन्त्रविद्विजितेन्द्रियः ।१०८ अष्टोत्तरशतं नित्यं मण्डलाद्धनदोभवेत् । हविषा गुडमिश्रेण जुहुयादर्थवान् भवेत् ।१०९ जपापुष्पाणि जुहुयादष्टोत्तरसहस्रकम् । गृहीत्वा प्रजपेद्भस्म नागवल्लीसमन्वितम् ।११० तिलकं तनुयात्तेन सर्ववश्यकरं भवेत् । ब्रह्मवृक्षसमित्पुष्पैर्ब्राह्मणान्वशयेद्वशी ।१११ जातीपुष्पैश्च राजानं वैश्यान् रक्तोत्पलैः शुभैः । शूद्रान्नीलोत्पलैर्हुत्वा वशयेन्मन्त्रविन्नरः ।११२ मन्त्रधारी व्यक्ति लक्ष्मीवल्ली समुत्पन्न पुष्पों से तथा नन्द्यावर्त से प्रसूत प्रसूनों से और घृत से प्लुत सिद्धार्थों से आहुतियां देता है,वह बहुत बड़ी श्री को प्राप्त किया करता है और सभी प्राणियों के द्वारा मान किया जाता है । जो जीरक से मिश्रित मिरचों से तथा अजाप्लुत नारिकेलोंसे गुड़ के सहित, घृत में पकाये हुए घृत में लोलित पूओं से हवन करे तथा पायस का आहर करे और इन्द्रियों को जीत लेने वाला रहकर नित्य एक सौ आठ आहुतियाँ देवे तो मण्डल में वह धनद हो जाया करता है । गुड़से मिश्रित हवि से हवन करे तो मनुष्य अर्थ वाला होता है ! मंडल का अर्थ उनचास दिन होता है । एक सौ सहस्र वार जपा के पुष्पों से आहुतियाँ देवे और फिर भस्म ग्रहण करके नाग वल्ली से समन्वित करके उससे तिलक करे तो सबको वश्य करने वाला होता है । पलाश के वृक्ष की समिधा और पुष्पों से वह ब्राह्मणों को वशीभूत कर लिया करता है । जाती के पुष्पों से राजा को, रक्त कमलों से वैश्यों को

शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित) · पृष्ठ 184, कुल 511 में से · BharatKosha