भारतकोश
शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary

लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा

स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished511 पृष्ठ

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पृष्ठ 186

१८६ ] [ श्री शारदा तिलक दूर्वा, सदाभद्रा, सहदेवी, मधुव्रता, मुशली, शक्रवल्ली, क्रान्ता, अपामार्ग इनके पत्तों को प्रियंगु, गोधूम (गेहूँ), मूंग, ब्रीहि, तिल, यव, शालि तण्डुल, उर्द इनका प्रक्षालन करके इनमें सबक प्रक्षेपण कर देवें । ११९३। ११६। शालितण्डलमाषांश्च प्रक्षाल्यैतेषु निःक्षिपेत् । धात्रीलकुचबिल्वानां कदलीनालिकेरयोः ।१२० फलान्यपि विनिःक्षिप्य पुष्पाण्येतानि निःक्षिपेत् । पद्मं सौगन्धिकं जाति मल्लिकां वकुलं तथा ।१२१ चम्पकाशोकपुन्नागतुलसीकेतकोद्भवम् । पल्लवानि वटाश्वत्थप्लक्षोदुम्बरशाखिनाम् ।१२२ ब्रह्मकूर्चं विनिःक्षिप्य चम्पकैः सफलान्वितैः । पिधाय कुम्भवक्त्राणि क्षौमैराच्छादयेत्ततः ।१२३ आवाह्य मध्यकलशे महालक्ष्मीं प्रपूजयेत् । यजेदुमायाः शिष्टेषु कलशेष्वष्टसु क्रमात् ।१२४ गन्धैर्मनोहरैः पुष्पैर्धूपदीप समन्वितैः । निवेद्य भक्ष्यभोज्यानि तान्स्पृष्ट्वा प्रजपेन्मनुम् ।१२५ त्रिसहस्रं, जपस्यान्ते साध्यमानीय संयतम् । संस्थाप्य स्थण्डिले पीठं तस्मिस्तं विनिवेशयेत् ।१२६ धात्री (आँवला) लकुच, विल्व, केला, नारियल में फलों का निक्षे- पण करके इनके पुष्पों का भी क्षेपण कर देवे । पद्म, सौगन्धिक, जाती मल्लिका, वकुल, चम्पक, अशोक, पुन्नाग, तुलसी और केतकी से समु- त्पन्न पुष्प लेवे और प्रक्षिस करे । वट, अश्वत्थ (पीपल) प्लख (पाखर) उदुम्बर ( गूलर ) के वृक्षों के पत्ते तथा फलान्वित चम्पक के सहित ब्रह्म कूर्च को निःक्षिप्त करके कुम्भों के मुखों को ढककर क्षौम वस्त्र से आच्छादित कर देवे । जो मध्य में कलश है उसमें भली भाँति आवाहन करके महालक्ष्मी का पूजन करे । शेष बचे हुए कलशों में जो आठ हैं क्रम से उमा आदि का यजन करना चाहिए । सुगन्ध, सुन्दर पुष्प, धूप,