शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)
Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary
लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा
स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)
पृष्ठ 187, कुल 511 में से
संदर्भ में पढ़ेंअष्टम पटल ] [ १८७ दीप, भक्ष्य, भोज्य उनको निवेदित करके स्पर्श करके फिर मन्त्र का जप करे । तीन सहस्र जप करके अन्त में साध्य का अनायन करे जो सङ्गत हो । स्थण्डिल में संस्थापन करके उसमें उसका विनिवेश करना चाहिए ।१२०।१२६। रम्यैराभरणैर्वस्त्रै रलङ्कृत्य समादरात् । सुमङ्गलीभिर्नारीभिः क्षिप्तपुष्पाक्षतान्वितम् । १२७ अर्चितानां द्विज तीनामाशीर्वादपुरःसरम् । नदत्सु पञ्चवाद्येषु मुहूर्ते शोभने सुधीः । १२८ मध्यस्थं कुम्भमुत्सृज्य महालक्ष्मीमनुस्मरन् । अभिषिञ्चेत्क्रमादन्यैः कलशैरपि देशिकः ।१२६ करेणास्य शिरःस्पृष्ट्वा प्रयुञ्जीताशिषं गुरुः । भद्रमस्तु शिवं चास्तु महालक्ष्मीः प्रसीदतु ।१३० रक्षन्तु त्वां सदा देवाः संपदः सन्तु सर्वदा । अथोत्थायाभिषिक्तः सन् वाससी परिधाय च ।१३१ यथाविधि समाचाम्य दण्डवत्प्रणमुद्गुरुम् । वस्त्रै राभरणैर्धान्यैर्धनैर्गोमहिषादिभिः । १ ३२ दासीदासैश्च विधिवत्तोषयेद्देवताधिया । ब्राह्मणान्भोजयेत्पश्चाद्दीनान्धकृपणैः सह ।१३३ उसको सुन्दर भूषणों से — वस्त्रों से आदर के साथ समलंकृत करके फिर सुमङ्गली नारियों के द्वारा उसमें पुष्प और अक्षतों का प्रक्षेपण करावे । पूजित विप्रों के आशीर्वाद पूर्वक वाद्यों के बजाये जाने पर शोभन मुहूर्त में विद्वान् मध्य में स्थित कुम्भ का उत्सर्जन करके महा- लक्ष्मी का अनुस्मरण करते हुए आचार्य क्रम से अन्य कलशों के द्वारा भी अभिषिञ्चन करे । गुरु कर से इसके शिर का स्पर्श करके आशीर्व- चन का प्रयोग करे । आशीर्वचन इस निम्न प्रकार से करे—'कल्याण' होवे—मङ्गल होवे —महालक्ष्मी प्रसन्न होवे । आपको सदा ही देवगण रक्षित रक्खें और सर्वदा सम्पदाएं होवें । इसके अनन्तर अभिषिञ्च