शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)
Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary
लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा
स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)
पृष्ठ 200, कुल 511 में से
संदर्भ में पढ़ें२०० ] । श्री शारदा तिलक वज्रादीन्यपि तद्वाह्ये देवीमित्थं प्रपूजयेत् । पूज्यते सकलैर्देवैः किपुनर्मनुजोत्तमैः ।४२ ये सब पाश, अंकुश, वरदान, अभयदान के धारण करने वाली हैं और इनका शरीर अरुण वर्णमाला है। इसके उपरान्त सोलह पत्रों में षोडश शक्तियों का यजन करे—कराली, विकराली, उमा, सरस्वती, दुर्गा, श्रीउषा लक्ष्मी, श्रुति, स्मृति, धृति, श्रद्धा, मेधा, मति, कान्ति, आर्या, ये सोलह शक्तियाँ हैं। ये खङ्ग और खेटक के धारण करने वाली ये श्यामा मातायें पूजा के योग्य हैं। कमल के वाहिर परिचा- रिका शक्तियों का अभ्यर्चन करना चाहिए । ३६।३८। प्रथमा अनङ्ग रूपा है फिर अनङ्ग मदना, मदनपुरा, भुवनवेगा, भुवन पालिका, सर्व शिशिरा, अनङ्ग वेदना, अनङ्ग मेखला, ये चम्पक, तालवृन्त, ताम्बूल, उज्ज्वल छत्र, चमर, अंशुक और पुष्प को कर कमलों से धारण किये हुए हैं। समस्त आभूषणों से संदीप्त लोकपालों का यजन बाहिर करना चाहिये ।३६।४१। उनके बाहिर वज्र आदि आयुधों का अर्चन करे इस प्रकार देवी का पूजन करना चाहिए। इसी भाँति ये समस्त देवगणों के द्वारा पूजी जाया करती है फिर मनुष्यों के द्वारा पूजा किया जाना तो कहा ही क्या जा सकता है ।४२। मंत्री त्रिमधुरोपेतैर्हुत्वाश्वत्थसमिद्वरैः । ब्राह्मणान्वशयेच्छीघ्रं पार्थिवान्पद्महोमतः ।४३ पालाशपुष्पैस्तत्पत्नीमन्त्रिणः कुमुदैरपि । पञ्चविंशतिसञ्जप्तैर्जलैः स्नानं दिनेदिने ।४४ आत्मानमभिषिञ्चेद्यः सर्वसौभाग्यवान् भवेत् । पंचविंशतिसंजप्तं जल प्रात पिबेन्नरः ।४५ अवाप्य महतीं प्रज्ञां कवीनामग्रणीर्भवेत् । कर्पूरागुरुसंयुक्तं कुंकुमं साधु साधितम् ।४६ गृहीत्वा तिलकं कुर्याद्राजवश्यमनुत्तमम् ।