भारतकोश
शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary

लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा

स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished511 पृष्ठ

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२१० ] [ श्री शारदा तिलक करता है। नमक से संमिश्रित सर्षपों से जो आज्य से अक्त होवें रात्रि के समय में हवन करना चाहिए ।६१। राजानं वशयेत्सद्यस्तत्पत्नीमपि साधकः । अन्नवानन्नहोमेन श्रीमान्पद्महुताद्भवेत् ।६२ राजवृक्षसमुद्भूतै पुष्पैर्हुत्वा कविर्भवेत् । अरोगी तिलहोमेन घृतेनायु॒रवाप्नुयात् ।६३ प्राक्प्रोक्तान्यपि कर्माणि साधयेत्साधकोत्तमः ।६४ आलिख्याष्टदिमर्गलान्यउदरगं पाशादिकं त्र्यक्षरं कोष्ठेष्वङ्गमनून् परेषु विलिखेदष्टाणर्मन्त्रद्वयम् । अच्पूर्वापरषट् कयुग्लयवरान् व्योमासनानर्गले- ष्वालिख्येन्द्रजलाधिपादिगुणशः पङ् क्तिद्वयं तत्परम् ।६५ कोष्ठेष्वष्टयुगार्णमात्मसहितां युग्मस्वरान्तर्गतां मायां केसरदिग्दलेषु विलिखे मूलं त्रिपङ्क्तिक्रमात् । त्रिःपाशाङ् कुशवेष्टितं लिपिभिरावीयं क्रमाद्वृत्तक्रमात । पद्मस्थेन घटेन पङ्कजमुखेनावेष्टितं तद्बहिः ।६६ घटार्गलमिदं यन्त्रं मत्रिणां प्राभृतं मतम् । पाशश्रीशक्तिकन्दर्पकामशक्तीन्दिरांकुशाः ।६७ प्रथमोऽष्टाक्षरो मन्त्रः ततः कामिनि रञ्जिनि । स्वाहान्तोऽष्टाक्षरः सद्भिर्परपरः परिकीर्त्तितः ।६८ साधक व्यक्ति तुरन्त ही ऐसा करने से राजा को अपने वश में कर लिया करता है और उनकी पत्नी को भी वश्य कर लेता है। अन्न के होम से अन्न वाला हो जाता है। पद्मोंके होम से श्रीमान् होता है ।६२। राज वृक्ष में समुत्पन्न पुष्पों से हवन करके कवि हो जाया करता है। तिलों के होम से रोग रहित और घृत के हवन करने से आयु को प्राप्त किया करता है ।६३। साधना करने वालों में उत्तम साधक व्यक्ति पूर्व में वर्णित भी कर्मों को करे ।६४। अब घटार्गल यन्त्र बतलाते हैं—आठ