भारतकोश
शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary

लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा

स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished511 पृष्ठ

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पृष्ठ 214

२१४ ] [ श्री शारदा तिलक दशम पटल दुर्गा प्रकरण ततो दुर्गामनुं वक्ष्ये दृष्टादृष्टफलप्रदम् । मायाऽद्रिः कर्णविन्दाढ्यो भूयोऽसौ सर्गवान्भवेत् । १ पञ्चान्तकः प्रतिष्ठावान्मारुतो भौतिकहासनः । तारादिर्हृदयान्तोऽयं मन्त्री वस्वक्षरात्मकः । २ ऋषिश्च नारदश्छन्दो गायत्रं देवनामनोः । दुर्गा समीरिते। सदभिर्दु रितापन्निवारिणी । ३ नमस्कारयुक्तेन मूलमन्त्रेण साधकः । ह्रामाद्यैः सह कुर्वीत षडङ्गानि यथाविधि । ४ सिंहस्था शशिशेखरा मरकतप्रख्यैश्चतुर्भिर्भुजैः । शंखं चक्रधनुः शरांश्च दधतीं नेत्रैस्त्रिभिः शोभिता । आमुक्ताङ्गदहारकङ्कणरणत्काञ्चीरणन्नूपुरा दुर्गा दुर्गतिहारिणी भवतु वो रत्नोल्लसत्कुण्डला । ५ वसुलक्षं जपेन्मन्त्रं तिलैर्मधुरलोलितैः । पयोऽन्धसा वा जुहुयात्तत्सहस्रं जितेन्द्रियः । ६ पीठमित्थं यजेत्सम्यक् नवशक्तिसमन्वितम् । प्रभा मया जया सूक्ष्मा विशुद्धा नन्दिनी पुनः । ७ सुप्रभा विजया सर्वसिद्धिदा नव शक्तयः । अर्चिर्ह्रस्वत्रयक्लीवरहितैः पूजयेदिमाः । ८ इसके अनन्तर दुर्गा के मन्त्र के विषय में बतलाऊँगा जो दृष्ट और अदृष्ट के फल को प्रदान करने वाला होता है। अब मन्त्र का उद्धार बतलाया जाता है—माया—शक्ति का बीज—हकार, ठकार, विन्दु से आढ्य हूँ, फिर विसर्गों से युक्त हुकार, पञ्चान्तक मकार आकार से युक्त गा, यकार, भौतिकहासन अर्थात् थे, मारुत से यकार जिसके आदि में प्रणव है और अन्त में हृदय है यह मन्त्र आठ अक्षरों वाला होता है