शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)
Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary
लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा
स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)
पृष्ठ 229, कुल 511 में से
संदर्भ में पढ़ेंदशम पटल ] [ २२६ ज्वरे ग्रहे गरे सर्पे तर्जन्या संस्पृशञ्जपेत् । स्मृत्वा शूलकरां देवीं तत्क्षणादेव तान्हरेत् ।८६ गर्भितं साध्यनामानैः पत्रे मनुमिमं लिखेत् । कुलालमृत्कृतायां तत्प्रतिमायाँ हृदि न्यसेत् ।६० कृतप्राणप्रतिष्ठान्तां पूजितां कुसुमादिभिः । निधायाग्रे जपुम्मन्त्रष्टोत्तरसहस्रकम् ।६१ इसका प्रकार यह होता है कि वह मन्त्र का ज्ञाता पुरुष निरन्तर अपने सम्पूर्ण अभीष्ट को साधित कर लिया करता है। कुमुदों के होम से विप्रों को और पद्मों के हवन से नृपतियों को वश में कर लिया करता है ।८५। बुध पुरुष विकसित उत्पलों के होम से उनकी पत्नियों को और कल्हार के पुष्पों से वैश्यों को तथा लवण के होम स शूद्रों को और जाती पुष्पों के होम से समनरों को वश में कर लेता है ।८६। व्रीहियों के द्वारा नित्य हवन करे तो एक वर्ष में वह व्रीहि वाला हो जाता है। दूर्वा के होम से दीर्घ आयु वाला और मधु के होम से होम करने वाला रत्नों वाला हो जाया करता है ।८७। अन्न के होम से अन्न की समृद्धि होती है तथा आज्य के होम से धन का लाभ किया करता है । गाय के दूध से होम करने से गोओं भी वृद्धि हुआ करती है इसमें कुछ भी संशय नहीं है ।८८। ज्वर में, ग्रह, में विष में और सर्प दंशन में अपनी तर्जनी के द्वारा स्पर्श करते हुए जप करना चाहिए उस समय में शूल कर में धारण करने वाली देवी का स्मरण करके ही स्पर्श करे तो उसी क्षण उन सबका हरण कर दिया करता है ।८६। साध्य के साथ के वर्णों से गर्भित पत्र में इस मन्त्र को लिखे । कुम्हार की मिट्टी से निर्मित की हुई प्रतिमा के हृदय में न्यास करे । उसकी प्राण प्रतिष्ठा करके पुष्प आदि के द्वारा पूजित करे । उसको अपने आगे रखकर के एक सहस्र आठ बार मन्त्र का जप करे ।६०-६१। सध्यास पक्षमात्रेण वशमायाति वाँछितम् । अभ्यर्च्य देवीमनले तीक्ष्णतैलेन मंत्रवित् ।६२