भारतकोश
शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary

लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा

स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished511 पृष्ठ

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· दशम पटल ] [ २३१ चिता की अद्भुत भस्म को शत्रु के मस्तक में निक्षिप्त कर देवे तो विद्विष्ट देश से गमन कर जाया करता है ।६८। मरुन्निपातितैः पत्रैः कारस्करसमुद्भवैः । तस्य पादरजोयुक्तैर्होमादुच्चाटयेदरीन् ।६६ कारस्करमयीं कृत्वा प्रतिमां च सुशोभनाम् । जप्तां प्रतिष्ठितप्राणां छेदयेदंगशः पुनः ।१०० काकोलूकवसायुक्तष्टोत्तरसहस्रकम् कृष्णपक्षचतुर्दश्यां श्मशाने हव्यवाहने ।१०१ जुहुयान्म्रियतेऽरातिरेवमेव दिनत्रयात् । उन्मत्तसमिधां होमान्नूताः स्युः शत्रवः क्षणात् ।१०२ उलूककाकयोः पत्रैः स्ववसारक्तसंयतैः । जुहुयान्निशि कांतारे शत्रुः कालातिथिर्भवेत् ।१०३ शत्रोः प्रतिकृति मंत्री प्रतिष्ठितसमीरणाम् । शोषणेन विलिप्तांगीमत्युष्णां निक्षिपेज्जले ।१०४ ज्वराक्रांतो भवेच्छीघ्रन्दग्धसेकाच्छम नयेत् । तर्जनीं त्रिशिख दोर्भ्याधारयन्तीं भयङ्कराम् ।१०५ रक्तां ध्यात्वा रवेर्बिम्बे प्रजपेद्यु तं मनुम् । मारये दचिरादेव रिपुन्बन्धुसमन्वितान् ।१०६ खड्गखेटकसन्नद्धां संक्रुद्धां भानुमण्डले । ध्यात्वा मंत्र जपेन्मंत्रो नाशये द चिरादरीन् ।१०७ वायु के द्वारा गिराये हुये कारस्कर से समुत्पन्न पत्रों से जो उसके चरणों की रज से युक्त होंवे, इससे होम करने से शत्रुओं का उच्चाटन करे ।६६। कारस्कर से परिपूर्ण सुशोभन प्रतिमा का निर्माण करके प्राण प्रतिष्ठा करके अभिमन्त्रित करे । फिर अंकुश से छेदन करे और काक तथा उल्लू की वसा से युक्त करके एक सहस्र आठ वार कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी में अग्नि में श्मशान में हवन करे इससे तीन दिन में ही शत्रु की मृत्यु हो जाती है । उन्मत्त की समिधाओं के होम से एक ही क्षणमें