शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)
Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary
लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा
स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)
पृष्ठ 239, कुल 511 में से
संदर्भ में पढ़ेंएकादश पटल ] [ २३६ लजैस्त्रिमधुरोपेतैर्होमः कन्या प्रयच्छति ।१६ अनेन विधिना कन्या वरमाप्नोति वाँछितम्। आज्यःक्तहविषा होमः साधयेदीस्पितं नृणाम् ।२० दध्ना विलोलि (१) तैर्लोणैर्होमो निशि चतुदिनम्। संवादं कुरुते तद्वश्यं वितनुते सदा ।२१ यह सिद्ध मन्त्र है फिर कथ्य प्रेरित प्रयोगों को करे। दिनो दिन शुद्ध जलो के द्वारा गणनायक तर्पण का करना चाहिये । अतन्द्रित रह- कर चारसौ चोवालीस दिन करे तो मण्डल के पूर्व ही मनुष्य अधिक अभीष्ट की प्राप्ति किया करता है ।१५-१६। नारियलो के द्वारा होम किये जाने वाला पुरुष जोकि चतुर्थी में करे तो यह श्री का प्रदाता होता है। शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से आरम्भ करके दिन में सुधी चतुर्थी के अन्त तक नारियल, सक्तु, लाजा ओर तिलों से क्रमश- चारसौ आहुतियां देवे तो सभी जन्तुगण वंश्य हो जाते हैं ।१७-१८। तिलो के सहित तण्डुलों के द्वारा किया होम लक्ष्मी के वश करने वाला होता है तीन मधुरों से अक्त लाजाओ से किया गया होम कन्या को दिया करता है ।१६। इस विधान में कन्या अपने अभीष्ट वर को प्राप्त किया करती है। मनुष्यों के दोरिपत को आज्य से अक्त हवि से किया हुआ होम साधित कर देता है ।२०। हवि से लोलित लोण से रात्रि मे चार दिन तक किया हुआ होम सम्वाद करता है उस भाँति अवश्य ही सदा विस्तार करता है ।२१। श्वेतार्कभवमूले रक्तचंदनदारुणा । इभभज्जेन निम्बेन दान्तदन्तेन वा कृतम् ।२२ विघ्नेश्वर समभ्यर्च्य शीताँशुग्रहणे जपेत् । स्पृष्ट्वा मंत्री निराहारस्त शिखायाँ समुद्वहन् ।२३ युद्धेषु व्यवहारादौ विजयश्रियमाप्नुयात् । मन्त्रेधानेन सजप्ता रोचना मदसयुतां ।२४ तिलकक्रियया सर्वान्वशं नयति मानवान् ।