भारतकोश
शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary

लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा

स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished511 पृष्ठ

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२४४ ] [ श्री शारदा तिलक करना चाहिए ।५४। रति के करों में उत्पल है और कोदन्डे अस्त्र को धारण करने वाला कामदेव है। सौम्य दिशा में प्रियङ्गु वृक्ष के नीचे मही और पौत्री का अर्चन करे ।४५। भूमि अपने हाथों मे शुक्ल व्रीहि के अग्रभाग को धारण करने वाली है और गदा तथा चक्र को धारण करने वाला पति है। देव के आगे लक्ष्मी के सहित गोपनायक का यजन करना चाहिए ।४६। छै कोणोंमें आमोद आदिक श्री से समन्वित पूजित करने चाहिए। अग्नकोण में सिद्धि के सहित आमोदका अर्चन करे ।४७। अग्निकोण में समृद्धि से संयुत प्रमोद का अर्चन करना चाहिये । ईश कोण में कान्ति के साथ सुमुख का यजन करे ।४८। वरुण कोण में मदनावती से समन्वित दुर्मुखका अर्चन करना चाहिये। निशाचर कोण में महद्वा के सहित विघ्न का पूजन करे ।४६। वायव्ये विघ्नहर्त्तारं द्राविण्या सहितं यजेत् । पाशांकुशाभयाभीष्टधारिणोऽरुणविग्रहाः ।५० गण्डभित्तिगलद्दानपूरधौतमुखाऽम्बुजा । विघ्नास्तत्प्रमदाः सर्वा मदाघूर्णितलोचनाः ।५१ एकहस्तधृताम्भोना इतरालिङ्गितप्रियाः । षट् कोणपार्श्वयोः पूज्योः शंखपद्मनधी क्रमात् ।५२ निजप्रियाभ्यां सहितौ पूर्वोदोरितलक्षणौ । केतरेष्वङ्गपूजा स्याद्ब्राह्मयाद्याः पत्रमध्यगाः ।५३ बहिर्लोकेश्वराः पूज्या वज्रादीनि ततः परम् । इत्थं जपादिभिः सिद्धः प्रयोगांत्स्वमनो षितान् ।५४ साधयेदष्टभिर्देवैर्येत्नैर्व्वाकल्पचोदितै । पद्महोमेन भूपालॉस्तत्पत्नीरुत्पलैः शुभैः ।५५ मन्त्रिणः कुमुदैः फुल्लैर्विप्रान् पिप्लसम्भवेः । समिद्वरैर्नैरपतीनुदुम्बरसमुद्भवैः ।५६ वायव्य कोणमें द्राविणी के साथ विघ्नहर्त्ता का यजन करे। ये सब पाश-अंकुश और अभीष्ट के धारण करने वाले हैं और इसका