भारतकोश
शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary

लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा

स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished511 पृष्ठ

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एकादश पटल ] [ २५१ प्राप्त किया करता है। शर्करा नारियल के फलों से तथा कदली के पके हुये फलों से होम करके सम्पूर्ण लोक को अपने वश में ले आता है । शर्करा से समन्वित पृथुकों से होम करके राजा को और शुभ सक्तुओंसे होम करके ब्राह्मणों को वश में कर लेता है। तथा घृत के द्वारा होम करने से धनवान् होता है, इसमें कुछ भी संशय नहीं है ।८५। शक्त्या रुद्धं निज बीजं वशमानयठद्वयम्। तारोद्योमनुराख्यातो रुद्रसंख्याक्षरान्वितः ।८६ ऋष्याद्याः पूर्वमुक्ताः स्युरङ्गमन्त्रपदैर्भवेत् । एकेनादौ त्रिभिर्द्वाभ्यां त्रिभिर्द्वाभ्यामनन्तरम् । समस्तेनास्त्रमाख्यातगंक्लृप्तिरियं मता ।८७ हस्तैर्बिभ्रतमिक्षुदण्डवरदौ पाशाङ्कुशौ पुष्कर स्पृष्टस्वप्रमदावरांगमनयाऽऽश्लिष्टं ध्वजाग्रस्पृशा । श्यामांगया विधुताब्जया त्रिनयनं चन्द्राद्धंचूडंब्वपा- रक्तं हस्तिमुखं स्मरामि सततं भोगातिलोलं विभुम् ।८८ लक्षत्रयं जपेन्मन्त्रमिक्षु खण्डैर्दशांशतः । अपूपैराज्ययुक्तैर्वा जुहुयान्मन्त्रसिद्धये ।८६ स्वगुरुं धनधान्याद्यैः प्रीणयेत्प्रीतमानसः । पूजा पूर्ववदादिष्टाततः काम्यानि साधयेत् ।६० हत्वापूपैस्त्रिमध्वक्तैर्वणयेद्भुवि पार्थिवान् । चतुर्थ्या नालिकेरेण महतीं श्रियमश्नुते ।६१ शक्ति (स्वाहा) से रुद्ध निज बीज (ग) होवे और वश मानय-यह पद मता दो ठकार होवें, आदि में प्रणव होवे, यहमन्त्र एकादश अक्षरों वाला कहा गया है ।८६। इसके ऋषि आदिक पूर्व में कह दिये गये हैं। अङ्ग मन्त्र पदों से होते हैं। आदि में एक से, दो से, तीन से और अन- न्तर में दो और तीन से तथा समस्त से अस्त्र कहा गया है। यही अङ्ग क्लृप्ति मानी गयी है ।८७। अब ध्यान बतलाया जाता है-करों के द्वारा इक्षु दण्ड और वरदान धारण किये हुए हैं तथा पाश और