भारतकोश
शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary

लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा

स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished511 पृष्ठ

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२६२ । [ श्रीशारदा तिलक अनेकमेकं गजमेकदन्तं चैतन्यरूपं जगदादिबीजम् । ब्रह्मेति यं ब्रह्मविदोवदन्ति तं शम्भुसुतं शरणं भजामि ।१४६ स्वाङ्कस्थिताया निजवल्लभाया मुखाम्ब जालोकनलोलनेत्रम् । स्मेराननास्यं मदवैभवेन रुद्धं भजे विश्वविमोहनं तम् ।१४७ मद से समुल्लसित पाँच मुखों के द्वारा निरन्तर समस्त आगमों के अर्थ को देवों और ऋषियों को पढ़ाते हुए भक्तजनों के एक मित्र परम दयालु हेरम्ब की मैं शरण में जाता हूँ ।१४१। अपने अतीव गमन चरण कमलों के द्वारा कृपा करके धरित्री को कृतार्थ करते हुये आप्तवचनों के अकारण कारण स्वरूप उन गजमुख प्रभु को चित्त कभी त्याग नहीं करता है ।१४२। जिसने सत्यवती के पुत्र व्यासदेव को अपनी विषाण की कोटि से पुराण का लेखन करके अर्पितकर दिया था उन चन्द्रमौलि शिव के पुत्र का जो तपोंके द्वारा अवाध्य है और आनन्दघन हैं मैं भजन करता हूँ ।१४२। स्तुतियों का अपद अर्थात् अस्थान और श्रुतियों का अपद अर्थात् जो श्रुतियों का भी स्थान नहीं है, अष्ट मूर्ति का परम लीलाववतार हैं। वह नाग स्वरूप से युक्त हैं अथवा पुरुष स्वरूप वाले हैं ऐसे भेद के अयोग्य आद्य विघ्नराज का भजन करो ।१४४। पाश- अंकुश भग्न दन्त और अभीष्ट को कर कमलोंके द्वारा धारण करने वाले करों के रन्ध्रों (छिद्रों) से मुक्त- मुक्ताफल की आभा वाले पृथु सीकरों के समुदायों से शिवा और शिवके अङ्गों का सेवन करते हुए गणेश का मैं भजन करता हूँ ।१४५। अनेक एक दन्त--चैतन्य स्वरूप-जगत् के आदि बीज गज को अर्थात् गणेश को जिसको ब्रह्म के ज्ञाता जन ब्रह्म कहते हैं उन भगवान् शम्भु के पुत्र की मैं शरणागति में जाता हूँ अवलोकन करने में चंचल नेत्रों वाले-मदके वैभव से रुद्ध-स्मेर (मन्दहास्य) से संयुत आनन वाले, विश्व को विमोहित करने वाले उन गणेश का मैं भजन करता हूँ ।१४७। ये पूर्वमाराध्य गजानन त्वां शास्त्राणि सर्वाणि पठन्ति ऐषाम् ।