शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)
Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary
लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा
स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंत्रयोदश पटल ] [ ३०३ बैल्वैः फलैः कृतोहोम श्रीकरः परिगीयते । कुन्दुपुष्पाणि जुहुयादिच्छन् वाकछ्रियमव्ययाम् ।८१ अष्टाक्षरोदित पीठ पर हयग्रीव भगवान् का पूजन करना चाहिये । बीज के द्वारा मूर्ति की कल्पना करे बीज का इस तरह से उद्धार किया जाता है-विद्यत्-हः भृगु-सकार, उसमें स्थित अधीश-ऊदार, और बिन्दु-अनुस्वार, यह बीज कहा गया है । केसरों में चार बीजों को चार दिशाओंमें समर्चत करना चाहिये ।७७-७८। विदिशाओं में अङ्ग स्मृति, न्यास और सब शास्त्रों का पूजन करना चाहिये । पत्रों के मध्यों में विधान से अङ्ग देवताओं को अचित करे ।७६। वाहिरमें लोकेश्वर और उनके वज्रादि अस्त्रों का अर्चन करे । इस तरह से जो मानव देव का यजन किया करता है वह साक्षात् वागीश्वर ही हो जाया करता है।८०। बिल्व के फलों के द्वारा होम करने वाला श्री के करने वाला परिगीत किया जाता है । अन्वय । वाक् श्री की इच्छा करता हुआ कन्दके पुष्पों का हवन करे ।८१। मानुनानेन सञ्जप्तं घृतं ब्राह्मी रसैः शृतम् । कबितामावहेत्पुंसामनर्गलविजृम्भणाम् ।८२ वचाम नसञ्जाप्तां भक्षयेत्प्रातरन्वहम् । सर्ववेदागमादीनां व्याख्याता जायतेऽचिरात् ।८३ मनोरस्य समोनास्ति ज्ञानैश्वर्य्यप्रदोऽसरः । अनन्तोऽग्म्यासना सेन्दु बीज राताय हृन्मनुः ।८४ षडरोऽयमादिष्टोभजतां कामदामणिः । ब्रह्मा प्रोक्तो मुनिश्चन्दो गायत्र देवता मनो ।८५ देशिकेन्द्रैः समाख्यातो रामोराक्षसमर्द्दनः । दीर्घभाजा स्वबीजेन कुर्यादङ्गानि षट्क्रमात् ।८६ ब्राह्मी के रस से श्रुत को इस मंत्र के द्वारा अभिमन्त्रित करे तो इसके पास से पुरुष अनर्मल विजृम्भण वाली कविता का आवा- हन कर लेता है ।८२। इस मन्त्र से भली भाँति जपी हुई बच को प्राप्त