भारतकोश
शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary

लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा

स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished511 पृष्ठ

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पृष्ठ 306

३०६ ] [ श्रीशारदा तिलक राजवश्याय कमलैर्घनधान्यादिरम्पदे । नीलोत्पलानां होमेन वशयेदखिलं जगत् । ६७ बिल्वप्रसूनैर्जुहुयादिन्दिराऽऽवाप्यते नरः । दूर्वाहोमेन दीर्घायुर्भवन्मन्त्री निरामयः । ६८ रक्तोत्पलहुतामन्त्री धनमाप्नोति वांछितम् । मेधाकामन होतव्यं पलाशकुसुमैर्नवैः । ६६ तज्जप्तमम्भः प्रपिबेत्कविर्भवति वत्सरात् । तन्मन्त्रितान्नं भुञ्जीत महदारोग्यमाप्नुयात् । १०० दलों के अग्रभाग में धृष्ट—जयन्त—विजय—सुराष्ट्र—राष्ट्र- वर्धन—अकोप—धर्मपाल और सुनन्तका यजनकरे । ६०। इसके उपरान्त सभी आभरणों से सुसम्पन्न लोकपालों का अर्चन करना चाहिये । उनके बाहिर में उनके आयुधों का, वज्रादिक का पूजन करे । ६५। इस तरह से अर्चन आदि के द्वारा मन्त्र के सिद्ध हो जाने पर अभीष्ट कर्मों का साधन करना चाहिए । चन्दन के जल में समुक्षित करके जाती के कुसुमों के द्वारा होम करें । ६६। राजा को वश्य करने के लिए कमलों से होम करे तथा धनधान्य आदि सम्पदा को प्राप्त करने के लिये भी कमलों के द्वारा होम करे । नीलोत्पलों के द्वारा किये हुए होम से सम्पूर्ण जगत को वश में कर लिया करता है । ६७। इन्दिरा की प्राप्ति करने के लिए विल्व वृक्ष के पुष्पों से हवन करे । दूर्वा के होम से मंत्र- धारी पुरुष दीर्घ आयु वाला और नीरोग होता है । ६८। रक्तोत्पलों के होम से मंत्र को धारण करने वाला अपना वांछित धन प्राप्त किया करता है। मेधा की कामना वाले को नवीन पलाश के पुष्पों से होम करना चाहिए । ६६। इस मंत्र से अभिमंत्रित जल का पान करे तो एक वर्ष में मनुष्य कवि हो जाता है। उस मंत्र से मंत्रित अन्न को खावे' तो महान् आरोग्य को प्राप्त किया करता है । १००। तारं मध्ये विलिखतु मनुं षट्सु कोणेषु सन्धि- ष्वङ्गं मायां स्मरमपि लिखेत्कोणगण्डेषु पश्चात् ।