भारतकोश
शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary

लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा

स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished511 पृष्ठ

पृष्ठ 313, कुल 511 में से

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त्रयोदश पटल ] [ ३१३ रोचना गुरुकर्पूरलाक्षाकुङ्कुमचन्दनैः । गोमयाम्भसि सम्पिष्टैर्लिखेद्यन्त्रं शुभे दिने । १३४ लेखिन्या हेममय्याच सर्वकामप्रसिद्धये । स्वर्णपट्टे लिखेद्यन्त्रं राज्यश्रीसमवाप्तये । १३५ ग्रामसिद्ध्यै रजतजे ताम्रपट्टे धनाप्तये । भूर्जपत्रे निजेष्टाप्तौ क्षौमे भूमिद्विये लिखेत् । १३६ जपपूजादिभिः सिद्धं यन्त्रं कुर्यान्निजेप्सितम् । ग्रामपत्तनराष्ट्रेषु मन्त्रमेतत्सुसाधितम् । १३७ निखनेच्छुभवारौ साङ्गन्दिक्षु समर्चयेत् । क्षुद्रापमृत्युचोरादिभूतव्यालयमहाभयैः । १३८ नशक्यते परन्द्रष्टु तं वंश देवता वलात् । धरण्यन्ते धरेद्वन्द्वं द्विठान्तोऽयं ध्रुवादिकः । एकोनविंश यर्णाढ्यं धराहृदयमीरितम् । १४० वराहोऽस्य मुनिः प्रोक्तश्छन्दोनिचुदुदाहृतम् । देवता सर्वभूतानां प्रकृतिर्मसुधामता । १४१ रोचना—अगुरु—कर्पूर—लाक्षा—कुंकुम—चन्दन को गोमय के जल में पिष्ठ करके किसी शुभ दिन में यन्त्र को लिखना चाहिये । ।१३४। लेखनी हेममयी हो तो उससे लिखे तो सब कामनाओं की सिद्धि होती है । राज्य श्री की सम्पत्ति की प्राप्ति के लिखेसुवर्ण के पट्ट पर मन्त्र को लिखना चाहिये ।१३५। ग्राम की सिद्धि के लिये चाँदी के पट्ट पर लिखे और धन की प्राप्ति के लिये ताम्र के पट्ट पर लिये । अपने अभीष्ट की प्राप्ति में भोजपत्र पर तथा भूकी सिद्धि के लिये क्षोम पर लिखना चाहिये ।१३६। जप और पूजा आदि के द्वारा सिद्ध किया हुआ मन्त्र अपना ईप्सित को करे । ग्राम—पत्तन और राष्ट्र में यह मन्त्र सुसाधित होता है । शुभ वार आदि में गाड़ देवे और अग सहित दिक्षाओं में समर्चन करना चाहिये । इसके प्रभाव से क्षुद्र—अपमृत्यु चोर आदि—भूत व्याल और महान रोगों के द्वारा ऊसके वश को

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