भारतकोश
शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary

लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा

स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished511 पृष्ठ

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चतुर्दश पटल ] । ३२७ इस तरह से पुरश्चरण करने वाला मन्त्र का ज्ञाता इस मंत्र के द्वारा कल्प में निर्दिष्ट अपने अथवा दूसरे के प्रयोगों को करे ।५६। नवीन सहस्र उत्पलों को तीन मधुरों में अक्त करके नित्य होम करे तो एक ही मास में अभीष्ट की प्राप्ति होती है और एक वर्षमें धन धान्य- वान् हो जाया करता है ।५७। तीन मधुरों से उपेत रक्त पद्द्मों के द्व रा बारह सहस्र आहुतियां देवे तो लक्ष्मी आयु तथा वशीकरण की प्राप्ति होती है ।५८। तीन मधुरों से समुपेत लाजाओं का प्रातःकाल में हवन करने वाले पुरुष को कन्या की सिद्धि हो जाती है और कन्या को श्रेष्ठ वर की प्राप्तिहो जाया करती है ।५६। सपुरुष पय और घृतमें अव्यक्त दूर्वा का एक सौ दश वार प्रतिदिन होम करे तो भली भाँति दीर्घ आयु प्राप्त करता है ।६०। उस पुरुष के कृत्याद्रोह आदि के सहित सभी रोग नष्ट हो जाया करते हैं । अपामार्ग की मजरी से एक सप्ताह तक जिते- न्द्रिय रहकर होम करे तो यह होम सर्वदा भूत, कृत्या रोगों का विनाश कर दिया करता है ।६१-६२। क्रम के अनुसार ति-राजी-अपामार्ग- हवि-आज्य से दो सहस्र आहुतियां देवे तो क्षुद्र रोग और ग्रहों पर विजय प्राप्त कर लिया करता है ।६३। पयोक्तै रमृताखण्डैस्त्रिसहस्रं चतुर्दिनम् । अनेन विहितो हमो ग्रहज्वरविनाशनः ।६४ नृसिंहशक्तिबीजे द्वे शूले तारगते लिखेत् । तत्र ग्रहास्तं संस्थाप्य जपेन्मन्त्रं षडक्षरम् ।६५ अविश्य सद्यस्तं मुञ्चेद्ग्रहः क्रन्दन्भयाकुलः ।६६ आलिख्याग्निपुरद्वयं तदुदरे शक्तिं ससाध्यां लिखेत् । षट्कोणेषु षडक्षराण्यथमनोः किञ्जल्कसंस्थान् स्वरान् । पत्रेष्वष्टसु मन्त्रराजविहितान्वर्णान् क्रमाद्द्वादशः । काद्यर्णैः पुनरावृतं त्रितिपुरे कोणेषु चिन्तामणिम् ।६७ नारसिंहमिदद्यन्त्रं लिखितं भूर्जपत्रके । विधृतं शिरसा शीर्षरोगभूतज्वरान् हरेत् ।६८