भारतकोश
शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary

लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा

स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished511 पृष्ठ

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पंचदश पटल } [ ३५७ होम करे । वैष्णव पीठ पर रीति के अनुसार देवकी सुत का अभ्यर्चन करना चाहिए। अङ्गावरण की आराधना करके पत्रोंमें प्रियाओं का पूजन करे ।६४-६५। कालिन्दीनग्नजित्याख्या मित्रविन्दा ततः परम् । चारुहासिन्यथपरा रोहिणी जाम्बवत्यथ । ६६ रुक्मिणी सत्यभामेति कथिताश्चारुभूषणाः । पोताम्बरधराः सौम्याः करास्बुजधृताम्बुजाः । ६७ ऐरावतदीनभ्यर्चेद्गजानष्टौ ततो बहिः । लोकपालान्यजेन्मन्त्री वज्राद्यस्त्राणि तद्बहिः । ६८ इति सम्पूजयेद्देवं गोविन्दं जगतां पतिम् । कुर्वीत कल्पनिर्दिष्टान्प्रयोगान्निजवाञ्छितान् । ६६ लक्ष्मीप्रसूनैर्जुहुयाच्छियमिच्छन्ननिन्दिताम् । साज्येनान्नेन जुहुयादाज्यान्नस्य समृद्धये । १०० श्री भगवत्प्रियाओं के भ नामों का परिगणन किया जात है- कालिन्दी, नग्नजिती, मित्र विन्दा, चारुहासिनी, रोहिणी, जाम्बवती, रुक्मिणी, सत्यभामा - ये उनके नाम हैं और ये सब परम चारुतम भूषणों के धारण करने वाली है । पीताम्बर धारिणी-सौम्य, अपने कर कमलों में अम्बुजों को धारण कर रही है । ६६-६७। उनके बाहिर ऐरावत प्रभृति गजों की, जो आठ हैं, अभ्यर्चन करे । मन्त्रधारी पुरुष लोकपालों का यजन करे और उनके बाहिर वज्र आदि उनके आयुधों का पूजन करना चाहिए । ६८। इसी रीति से जगतों के पति गोविन्द देव का भली भाँति यजन करे । फिर कल्प में निर्दिष्ट अपने वाञ्छित प्रयोगों का समाचरण करे । ६६। अनिन्दित श्री की इच्छा रखता हुआ लक्ष्मी के पुष्पों से होम करे । अन्न की समृद्धि के लिये घृत सहित अन्न से होम करना चाहिए ।१००। आरण्यैः कुसुमैर्विप्रान् जातिभिः पृथिवीपतीन् । प्रसूनैरसितैर्वैश्यान् शूद्रान्नीलोत्पलेर्नवैः । १०१