शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)
Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary
लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा
स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)
पृष्ठ 358, कुल 511 में से
संदर्भ में पढ़ें३१८ ] [ श्रीशारदा तिलक वशयेल्लवणैः सर्वान्पङ्कजैर्वनििताजनान् । गोशालासु कृतो होमः पायसेन ससर्पिषा ।१०२ गवां शान्तिं करोत्याशु नोविन्दगोकुलप्रियः । शिमुवेषधरं देवं किङ्किणीदामशोभितम् ।१०३ स्मत्वा प्रतर्पयेन्मन्त्रो दुग्धबुद्ध्या शुभैर्जलैः । धनधान्यांशुकादीनि प्रीतस्तस्मै ददातिसंः । १०४ पिण्डमूलेन वीतं दहनपुरयुगे कोणराजद्रसार्णं । कुर्यात्पद्मं दशार्णस्फुरितदशदलं कामबीजेन वीतम् । पद्मं किञ्जल्कसस्थं स्वरविकृतिदलप्रोल्लसत्षोडशार्णं किजल्कं व्यञ्जनाढ्यं विकृतियगदलेष्वर्पितानुष्टुवर्णम् । १०५ पाशांकुशाभ्यामावीतं क्षोणीपुरयुगास्रिषु । अष्ट्राक्षरेण लसितं यन्त्रं गोविन्ददैवतम् ।१०६ जंगली पुष्पों के द्वारा होम करने से विप्रों को, जाती के पुष्पों मे पार्थिवों को--आति पुष्पों से वैश्यों और नवीन नीलोत्सलो से शूद्रों को वश में कर लेता है तथा लवण के होम से सबको ओर पंकजो के द्वारा होम का समाचरण करने से वनिता जनों को वश में कर लिया करता है । गोशालाओं में घत के साथ पांयस से किये होम से शीघ्र ही गोओं में गोकुलप्रिय गोविन्द शान्ति किया करते हैं । किंकिणी दाम से शोभित--शिशु वेष को धारण करने वाले देव का स्मरण करके दूध कीभावना करके शुभ जलके द्वारा मन्त्रधारी तर्पण करे । वे परम प्रसन्न होकर उसके लिये धन-धान्य वस्त्र आदि दिया करते हैं । १०१-१०४। अब यन्त्र बतलाया जाता है--पिण्ड बीज को मूल से परिवीत करे । छै वर्णोसे रंजित कोण में दहन पुर युग में एक पद्मकी रचना करे । जो पद्म दस वर्णों से स्फुरित दश दलों वाला होता है। यह काम बीज से वीत होवे । किजल्क से व्यञ्जनों आढ्य होवे । बत्तीस दलों में अर्पित अनुष्टुप् वर्ण वाला करे । पाश और अंकुश से आवीत करे । तीनों में