शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)
Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary
लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा
स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)
पृष्ठ 374, कुल 511 में से
संदर्भ में पढ़ें१७४ ] [ श्रीशारदा तिलक श्रीकण्ठ नाम वाले—शिखंडी का पूजन करे ।२४-२५। इनका वर्णं, रक्त, पीत, सित, आरक्त, कृष्णरक्त, अञ्जन, और असित है । ये सब अपने किरीटों में बालेन्दु को अर्पित किये हुए है--सभी पद्मों के आसनों पर विराजमान है और सब भूषणों से विभूषित है ।२५-२६। ये सभी तीन नेत्रों से समन्वित हैं और शूल, वज्र, अस्त्र, चार हाथों में धारण किये हुये हैं----मनोहर हैं । उत्तरादि में पीछे उमामहेश्वर का पुनः यजन करना चाहिए ।२७। ततो नन्दिमहाकालौ गणेशदृषभो पुनः । अथ भृङ्गिरिटि स्कन्दमेतान्मृग्मासनस्थितान् ।२८ स्वर्णतोयारुणश्याममुक्तेन्दुसितपाटलान् । इन्द्रादयस्ततः पूज्या वज्राद्यायुधसंयुताः ।२६ इत्थ संपूज्योद्देशं नित्यशो जयते । सर्वपापविनिर्मुक्तः प्राप्नुयाद्वाञ्छिता श्रियम् ।३० द्विसहस्रं जपेद्रोगात्मुच्यते नात्र संशयः । त्रिसहस्रं जपेन्मन्त्रं दीर्घमायुरवाप्नुयान् ।३१ सहस्रत्रद्वया प्रजपन् सर्वान् कामानवाप्नुयान् । आज्यान्वितैस्तिलैः शृद्धैर्जुहुयाल्लक्षमादरात् ।३२ उत्पातज्जनितान् क्लेशान्नाशयेन्नात्र संशयः । शतलक्षं जपेत्साक्षाच्छिवोभवति मानवः ।३३ इसके अनन्तर नन्दी और महाकाल, गणेश और वृषभ, भृङ्गी, रिटि, स्कन्द को पूजित करे । ये सब पद्म के आसनों पर संस्थित हैं ।२८। ये सब स्वर्णतोय, अरुण, श्याममुक्ता, इन्दु, सित और पाटल वर्णों वाले है । इसके अनन्तर इन्द्र देव आदि का जोकि वज्र आदि आयुधों से समन्वित है अर्चन करना चाहिये ।२६। इस रीति से देव का भली भांति अर्चन करे और नित्य ही सहस्र मन्त्र का जप करना चाहिए । ऐसे करने वाले पुरुष सभी पापों निर्मुक्त हो जाया करते हैं और ये अपनी मनोवांछित श्री की प्राप्ति कर लिया करते हैं ।३०।