भारतकोश
शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary

लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा

स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished511 पृष्ठ

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पृष्ठ 375

षोडष पटल ] [ ३७५ दो सहस्र मन्त्र का नित्य जप करे तो मनुष्य रोग से मुक्त हो जाता है--इसमें कुछ भी संशय नहीं है। तीन सहस्र यदि नित्य मन्त्र का जप करे तो जप करने वाला मानव दीर्घ आयु का लाभ प्राप्त किया करता है ।३१। इसी रीति से एक सहस्र की नित्य वृद्धि करने वाला पुरुष सभी कामनाओं को प्राप्त कर लिया करता है। शुद्ध आज्य से समन्वित तिलों से आदर के साथ एक लाख आहुतियाँ देवे तो उत्पातों से समु- त्पन्न क्लेशों का विनाश किया करता है--इसमें कुछ भी संशय नहीं है। वह शिव ही हो जाया करता है । ३२-३३। षडक्षरः शक्तिरुद्धः कथितोऽष्टाक्षरो मनुः । ऋषिश्छन्दः पुराप्रोक्तं देवता स्यादुमापतिः ।३४ अङ्गानि पूर्वमुक्तानि सोममीशं विचिन्तयेत् ।३५ बन्धूकाभं त्रिनेत्रं शशिशकलधरं स्मेरवक्त्रं वहन्तम् । हस्तैः शूलं कपालं वरदमभयदं चारुहारं भजामि । वामोरुस्तम्भगायाः करतलविलसच्चारुरक्तोत्पलायः । हस्तेनाश्लिष्ठदेहं मणिमयविलसद्भूषणायाः प्रियायाः ।३६ शक्ति से सम्पुटित षडक्षर 'अष्टाक्षर मन्त्र' कहा गया है इस मन्त्र के ऋषि और छन्द पहिले ही कहे हुए हैं। इसका देवता भगवान् उमापति है। इसके अङ्ग पूर्वमें कहे गये हैं। सोम और ईश का चिन्तन करना चाहिए ।३४-३५। अब ध्यान बतलाया जाता है । इसी के अनुसार देव के स्वरूप का चिन्तन करना चाहिए । ध्यान---बन्धूक के पुष्प के समान आभा से संयुत हैं---तीन नेत्रों से संयुत है-मस्तक में चन्द्रमा के खण्ड को धारण किए हुए हैं--मन्दस्मित से युक्त मुख वाले हैं--हाथों में शूल, कपाल, वरदान अभयदान धारण करने वाले हैं--सुन्दर हार से शोभित को मैं प्रणाम करता हूँ ।३५। आपके बाँये उरुस्तम्भ पर विराजमान और करतल में शोभित एवं सुन्दर रक्तोत्पल को लिए हुई है ऐसी प्रियतमा को, जो मणिमय कान्तियुक्त