भारतकोश
शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary

लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा

स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished511 पृष्ठ

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पृष्ठ 407

सप्तदश पटल । [ ४०७ दीप का विन्यास करना चाहिए ।८०। इसको घट से ढककर इसके पृष्ठ भाग पर इस मन्त्र को लिखे । जो भूतों से आत्तं होवे उसको यहाँ पर संस्थापित करके चिन्तामणि मन्त्र का जाप करना चाहिए ।८१। तमाविश्य क्षणान्नश्येद्ग्रहः क्रूरोऽपिसर्वथा ।८२ कृशानुभवनद्वये मनुमिमं लिखित्वा पुन— स्तदस्त्रिषु हलोलिखेत्स्वरयुग ततः सन्धिषु । ध्रुवेण परिवेष्ठितं धरणिगेहमध्यस्थितम् । मनोरथफलप्रदं भवति यन्त्रमेतन्नृणाम् ।८३ षट्कोणान्तस्त्रिकोणे लिखतु मनुमिमं साध्यनामाक्षराढ्यम् । षट्कोणेष्वङ्गमन्त्रान्वसुदलविवरेष्वष्टमन्त्राक्षराणि । वीतं बाह्यं कलाभिस्तदनु परिवृत कादिभिर्यादिभिस्त । त्क्षोणीबिम्बेन युक्तं नृहरिमनुयुजा यन्त्रमापद्ग्रहघ्नम् ।८४ अस्मिन्यन्त्रे प्रतिष्ठाप्य कलशं प्रोक्तवर्त्मना । कृताभिषेकः स्यात्कृत्याभूतद्रोहादिशान्तिदः ।८५ उसमें अविष्ट होकर ग्रह चाहे वह सर्वथा क्रूर होवे एक ही क्षण में नष्ट हो जाया करता है ।८२। अग्नि के दोनों गृहों में इस मन्त्र को लिखकर फिर उसके षट्कोण में हलो लिखे । फिर सन्धियों में दो स्वर लिखने चाहिए । ध्रुव से अर्थात् प्रणव से परिवेष्टित करे और धरणी के गेह के मध्य में स्थित करे । यह मन्त्र मानवों के मनोरथों के फल का प्रदान करने वाला होता है ।८३। इस मन्त्र को षट्कोण के अन्दर त्रिकोण में साध्य के नाम के अक्षरों से युक्त लिखे । षट्कोणों में अङ्गभूत मन्त्रों को लिखे और आठ दलों के विवरों में आठ मन्त्रों के अक्षरों का लेखन करना चाहिए । बाहर में कलाओं में वीत करे और इसके अनन्तर आदि और यादि से परिवृत करे तथा क्षोणी विम्ब से युक्त करे । यह नृसिंह मन्त्र से युक्त होवे तो यह यन्त्र आपदा और ग्रहों के नाश करने वाला होता है ।८४। इस मन्त्र में कहे हुए मार्ग