भारतकोश
शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary

लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा

स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished511 पृष्ठ

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पृष्ठ 420

४२० ] [ श्रीशारदा तिलक क्रमात्सर्पिर्पामार्गतिलसर्षपपायसैः । साज्यैः सहस्रं प्रत्येकं यामिन्यां जुहुयात्सुधीः ।१७ होमोऽयं नाशयेत्सद्यो भूतकृत्याद्युपद्रवान् । सितकिंशुकनिर्गुण्डी होमाऽपामार्गसम्भवैः ।१८ समिद्वरैः कृतोहोमः पूर्ववद्भूतशान्तिदः । चपामार्गारग्वधयोः पञ्चगव्यसमुक्षिताः ।१६ समिधो जुहुयात्कृष्णपञ्चम्यां निशि संयतः । पृथक् सहस्रहोमेन भूतानां निग्रहो भवेत् ।२० इस प्रकार से अर्चना आदि के द्वारा मन्त्र के सिद्ध हो जाने पर साधक इस मन्त्र के द्वारा अपने अभीष्ट प्रयोगों का समाचरण करे । वे सभी प्रयोग सिद्ध होते हैं-इसमें कुछ भी संशय नहीं है ।१६। फिर क्रम से घृत- अपामार्ग-तिल- सरसों और पायस से प्रत्येक की घृत के साथ सहस्र आहुतियाँ देवे और सुधी पुरुष रात्रि में होम करे । यह किया हुआ होम तुरन्त ही भूतों और कृत्या आदि के उपद्रवों का विनाश कर दिया करता है । सफेद पलाश (ढाक) निर्गुण्डी के द्वारा किया हुआ होम तथा अपामार्ग से समुद्भूत श्रेष्ठ समिधाओं से किया गया होम पूर्व की ही तरह भूतों को शान्ति का देने वाला होता है । ।१७-१८। अपामार्ग और आरग्वध की समिधाएं जो पञ्चगव्यमें संभु- क्षित की गयी होवे ।१९। मास की कृष्ण पक्ष की पंचमी में रात्रि के समय में संयत होकर हवन करे । पृथक् एक सहस्र होम से भूतों का निग्रह होता है ।२०। क्रमात्सर्पिरपामार्गं पञ्चगव्य दृविघूतैः । हुत्वा सहस्रं प्रत्येकं पात्रे संपा (१) नयेत्सुधीः ।२१ संपातसर्पिषा साध्यं भोजयेद्भूतशान्तये ।२२ मध्ये शक्तिं ससाध्यां स्वपगणसहितां केसरेष्वष्टवर्गा- न्पत्रान्तर्म्मन्त्रवर्णान् लिखिय गुणमितानग्रदेनेषु तद्वत् ।