शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)
Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary
लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा
स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)
पृष्ठ 442, कुल 511 में से
संदर्भ में पढ़ें४४२ ] [ श्रीशारदा तिलक दाओं के प्रदान करने वाले हैं ओर सभी तरह के सौभाग्य का भी देने वाला होता है ।१३७। जो पुरुष ग्रहोंके द्वारा किये हुये उपद्रवों से आत्तं अर्थात् पीड़ित होते हैं उनकी रक्षा करने वाला होता है । यह यन्त्र राजाओं के लिये विजय के वर्द्धन करने वाला करता है । इस तरह से आपदाओं के उद्धारण करने के कारण वह मन्त्र आपदाओं को दूर करने में समर्थ हुआ करता है ।१३८। तन्त्रेषु नास्ति मन्त्रोऽन्य इत्याहुर्मन्त्रवेदिमः । अर्धीशोवह्लिशिखरोलान्तस्थो दान्त ईरितः ।१३६ फठन्तश्चण्डमन्त्रोऽयं त्रिवर्णात्मा समीर्रितः । अस्य त्रिको मुनिः प्रोक्तश्छन्दोऽनुष्टुबुदाहृतम् ।१४० चण्डेशो देवता प्रोक्ता कुर्यादङ्गविधिं पुनः । हृदयं दीप्तफट् प्रोक्तं ज्वलफट् शिर ईरितम् ।१४१ शिखा ज्वालानालिनी फट् ज्ञेया, फट् कवचं मतम् । हनफट् नेत्रमाख्यातं मर्वज्वालिनि फट् परम् ।१४२ विन्यस्यैवं षडङ्गानि ततोदेवं विचिन्तयेत् ।१४३ मन्त्रों के ज्ञान रखने वाले विद्वान् यही कहा करते है कि तन्त्र शास्त्रों में इससे बड़ा अन्य कोई भी यन्त्र नहीं है और न इसको समा- नता रखने वाला कोई दूसरा मन्त्र है । अब खण्ड मन्त्र बताया जाता है, अर्धीश, ऊ, दान्त, घः, वह्निशिखर, ध्व, लान्तस्थ, दान्त कहा गया है । इसके अन्त से 'फट्'-यह शब्द होता है । यह मन्त्र तीन वर्णों के स्वरूप वाला कहा गया गया है । इस मन्त्र को ऋषि त्रिक कहा गया है और इसका छन्द अनुष्टुप् बताया गया है ।१३६-१४०। इस मन्त्र का देवता खण्डेश कहा गया है । फिर इसके अङ्गों की विधि को करना चाहिये । इसका हृदय दीप्त फट् कहा गया है और ज्वल फट् इसका शिर कहा गया है ।१४१। ज्वालामालिनी फट्-इसकी शिखा जाननी चाहिये और फट् यह इसका कवच बताया है । हस फट्-यह नेत्र कहा है और सर्व ज्वालिनि फट् परम है ।१४२। इस रीतिसे इसके