शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)
Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary
लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा
स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)
पृष्ठ 446, कुल 511 में से
संदर्भ में पढ़ें४४६ ] [ श्रीशारदा तिलक स्थूल और सूक्ष्म के विभागों से निर्देशन करने के योग्य - सांसारिक सम्भूत दुःखों को पूर्ण रूप से हनन करने वाले अर्थात् संसार में होने वाले सभी प्रकार के दुःखों को विनाश कर देने वाले भव शम्भु के लिए नमस्कार है ।१५६। वे तर्कों के मार्ग में अत्यन्त दूर देश वाले अर्थात् ऐसे स्वरूप वाले हैं जहाँ तर्कों की सर्वथा पहुँच ही नहीं होती है। सभी प्रकार की तपश्चर्याओं के सुफलों को प्रदान करने वाले - धर्म—अर्थ—काम—मोक्ष इन चारों वर्गों के फलों को देने में वदान्य अर्थात् महान् दानी और सभी कुछ के ज्ञान रखने वाले शिव के लिए बारम्बार नमस्कार है ।१५७। जिनका न तो कोई आदिकाल है और न कोई भी मध्यकाल है तथा न कोई अन्त काल ही होता है वे आदि— मध्य और अन्त से रहित हैं। सभी तरह की भीतियों को निरस्त कर देने वाले हैं अर्थात् उनके भजन करने वाले भक्तजनों को किसी भी प्रकार का भय नहीं हुआ करता है क्योंकि उनके उपास्य देव के सामने कैसा भी भय नहीं टिकता है। जो योगाभ्यास करने वाले योगियों का परम ध्येय है अर्थात् योगीजन अपने ध्यान में समाधिस्थ होकर भगवान् शिव का ही निरन्तर ध्यान किया करते हैं। वे भगवान् शम्भु सबसे महान् हैं अतएव उनका नाम महादेव कहा जाता है । वे त्रिगुणों से रहित हैं। संसार की वस्तुयें और प्राणीगण त्रिगुणों से समन्वित रहा करते हैं और देवगण भी सत्व, रज, तम इन तीन गुणों के चक्रसे शून्य नहीं हैं। किन्तु भगवान् शम्भु इन गुणों से रहित और निर्गुण हैं, ऐसे भगवान् शिव के लिये बारम्बार प्रणाम ।१५८। यह प्रभु विश्व की आत्मा है अर्थात् सम्पूर्ण विश्व इनका ही स्वरूप है । चिन्तन करने के योग्य नहीं है अर्थात् इनका स्वरूप किसी के भी चिन्तन में नहीं आ सकता विराजमान है और इनका मस्तक उस इन्द्र के विद्यमान रहने में चन्द्र विराजमान हैं। कन्दर्प (कामदेव) के दर्प को लिए काल स्वरूप हैं। परम शोभित हैं। कन्दर्प (कामदेव) के दर्प को लिये काल स्वरूप है । कामदेव को सबको वश में कर लेने का बड़ा भारी अभिमान था और