शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)
Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary
लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा
स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)
पृष्ठ 448, कुल 511 में से
संदर्भ में पढ़ें४४८ ] [ श्रीशारदा तिलक प्राप्त हुआ और उसका भय दूर हो गया था । तभी से शिव का शुभ नाम नीलकण्ठ हुआ है इक भगवान् का वाहन वृष है । ये सदा वृष के कन्धे पर समारूढ़ होकर ही विहार किया करते हैं । सरित के दाम से समावद्ध कपर्दीके लिए बारम्बार प्रणाम है । १६०। भगवान शिव का स्वरूप परम शुद्ध है । स्वरूप ही केवल नहीं आपके भाव भी परम शुद्ध हैं आप बहुत ही स्वल्प अर्चना और स्तुति से प्रसन्न हो जाते हैं अतएव इनका आशुतोष नाम है । इनकी अर्चना भी मँहगी नहीं होती है धतूरा, आक के पुष्प और जल से आप प्रसन्न हो जाया करते हैं । जो भी शुद्ध अन्तःकरण वाले है उन भक्तों की ये अन्तरात्मा है । त्रिपुर दैत्य के वध करने वाले पूर्ण और पुण्य नाम वाले भगवान शम्भु के लिये बारम्बार प्रणाम समर्पित है ।१६१। जो भी भक्ति करने वाले में और अपने भक्त हैं उनको सांसारिक सुखों का उपभोग और सांसारिक आवागमन के वन्धन से मोक्ष प्रदान करने वाले हैं । आप विवासा अर्थात् दिगम्बर हैं और आपका निवास भी कहीं नहीं है तथा विश्व के ईश हैं, उनको बारम्बार प्रणामहैं । तीनों (ब्रह्मा विष्णु महेश) मूर्त्तियों के आप मूलभूत हैं-तीन नेत्रों वाले हैं-इनको बारम्बार नम- स्कार है । तीनों धामों के धाम रूप जन्मों के विनाशक को बारम्बार प्रणाम है । देवों और असुरों के शिरो के रत्नों की किरणों से अरु- णित चरणों वाले-अपनी कान्ता के लिए कान्त-अर्ध भाग देने वाले को बारम्बार प्रणाम हैं। इस स्तोत्र के द्वारा जगतों के स्वामी को भक्ति से प्रीणित करे, जो भक्ति और मुक्ति के दाता सर्वत्र और परमेश्वर हैं ।१६५।