भारतकोश
शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary

लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा

स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished511 पृष्ठ

पृष्ठ 454, कुल 511 में से

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पृष्ठ 454

४५४ ] [ श्रीशारदा तिलक काली माररमाली कलीनमोक्षक्षमोनलीं । मामो देततदे मामा रक्ष तत्वत्वक्षरः । २३ काली मन्तूयं प्रोक्तः कालरात्रिश्च (स्व) वैरिणाम् । यमामाटटमामाय माटमोटटमोटमा । २४ वामो भूरिरिभूमो वा टटरीत्वत्व स्वस्वं) रीटृ । यमात्मकोयमाख्यातः श्लोको वैपिविनाशनः । २५ लिखेद्गुविषारानिम्बनिर्यासिकज्जैलैः । निग्रहाख्यमिदं यन्त्रं काकपक्षण कप्पटे । २६ विभोतवृक्षे वल्मीके श्मशाने वा चतुष्पथे । दक्षिणस्थेऽनिले मन्त्री निखनेदद्धंरात्रके । २७ सर्वथा शत्रुरेतेन सप्ताहान्मरणं ब्रजेत् । निगृह्यते महारोगैः पतितो वा भवेदसौ । २८ मारण मन्त्र बताया जाता है-इस मन्त्र को विष वृक्ष के तख्ते पर या मानव के चमड़े पर अथवा पट पर आठों प्रकारके विषोसे लिये और इसकी रात्रि में श्मशान मे गाड़ देवे । इसका परिणाम यह होगा कि शत्रु भयानक ज्वर से आविष्ट होकर मूच्छित-साहो जायगा तथा वेचनी से व्याकुल मन वाला हो जायगा फिर यह शत्रु एक पक्ष में निस्सन्देह यमलोक में चला जाता है । इक्यासी पदों में मध्य दहन में साध्य को लिखे और इसके अनन्तर फिर-वम लिखना तथा क्षभ्र ब्लूम इसको दिग्गतों में लिखे और इसके अनन्तर पत्तियों से बीजों को लिखना चाहिये । शिष्टों में ईश निशाचर आदि काली के मन्त्र को यक्तियों में लिखे । मध्य दहन का अर्थ है मध्य कोष्ठ रेफ । उसके बाहिर ईशाना दिनैऋर्त्तान्त को एकबार लिखकर फिर नैऋर्तादि ईशान्यन्त लिखना चाहिये । इस विधि से मन्त्र का लेखन करे । मन्त्र यह है-'काली भार- रमाली कालीन मोक्ष क्षमो नली । मामो देत तदे मामा रक्ष तत्वक्षरं ।२०-२३। यह काली का मन्त्रा कहा गया है और यह अपने शत्रुओं के लिए कोल रात्रि होता है । मन्त्रा यह है-'यमामाट टमामाय माट

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