भारतकोश
शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary

लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा

स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished511 पृष्ठ

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एकोनविंश पटल ] [ ४५५ मोटटमोटमा । वामो भूरिरिभूमो वाटटरीत्वत्व रीटट ।' यह श्लोक यम स्वरूप बताया गया है जो वैरियों के विनाश करने वाला है ।२४। ।२५। इसको अर्थात् यन्त्र (चक्र) को प्रेतके शूलाधिरूढ़ कपाट पर चिता के अङ्गार, आठ विष निम्बिका निर्यास के काजल से कौआ के पंख से लिखना चाहिये यह निग्रह नामक यन्त्रहै । बिभीत वृक्षके नीचे, वल्मीक पर, श्मशान में और चौराहे पर वायु के दक्षिण होने पर मन्त्र साधक को आधी रातमें निखनन करना चाहिए इससे सर्वथा शत्रु एक सप्ताह मेंमृत्यु को प्राप्त हो जाता है ।२६।२७। अथवा वह शत्रु महान् रोग से ग्रस्त होता है अथवा पतित हो जाता है ।२८। शिलायामिष्टकायां वा चक्रमेतत् प्रकल्पितम् । मर्कंटी विषदण्डीभिः समालिप्तमधोमुखम् ।२६ यत्र रात्रौ खनेत्तत्र भयोभूयोऽशुभम्भवेत् । लिखेच्चतुः षष्ठिपदेय् कालीपीशादिकन्यादि यमात्मकेन । श्लोकेन संवेष्ट्य कृशानुवायुबीजावृतं यन्त्रमिदं विदध्यात्।३० निशा विषमबीदण्डोमर्कंटीभिरधोमुखम् । निखनेद्यत्र तत्र स्यान्नृणामुच्चाटनं सदा । सस्यहानिमनावृष्ठि गवां नाशं करोति तत् ।३१ आख्यां तुम्बुरुमध्यतः स्मरगतामालिख्य जम्भादिकाम् विद्यां दिग्गतपत्रकेष्वथ लिखेत् देवीदलेषु स्मरम् । कोणस्थेषु सनामकं बहिरतः पात्रांगु शाध्यां वृतम् । यन्त्रं वश्यकरं ग्रहादिभयहृत् क्षुद्राभिचारापहम् ।३२ जम्भेजम्भिनि ठद्वन्द्वं मोहे मोहिनि ठद्वयम् । अन्धेअन्धिनि ठद्वन्द्वं रुन्धे रुन्धिनि ठद्वयम् ।३३ शिला पर अथवा ईंट पर इस चक्र को प्रकल्पित करे । विषदंडी से समालिप्त कर नीचे की ओर मुख करदे। जहाँ परभी रात्रिमें खनन करे वहाँ बारम्बार अशुभ होता है ।२६। अब उच्चाटन बताते हैं-श्लोक के रूप में काली का मन्त्र है । चौसठ पदोंमें यमात्मक काली मीशादि कंन्या