शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)
Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary
लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा
स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)
पृष्ठ 456, कुल 511 में से
संदर्भ में पढ़ें४५६ ] [ श्रीशारदा तिलक प्रभृति लिखे और श्लोक से संवेष्टित करके कृपालु वायु बीजों से आवृत्त इस यन्त्रों को बनाना चाहिये ।३०। निशा-विष मषी ब्रह्म दण्डी और मर्कटी अर्थात् कपि कच्छु से नीचे की ओर मुख करके जहाँ पर भी निखनन करे वहाँ मनुष्योंका सदा उच्चाटन होता है। यह सस्य अर्थात् फसल की हानि-वर्षा का न होना तथा गौओं का नाश किया करता है ।३१। कर्म के साथ ही साध्य और साधक का नाम होना चाहिये । कर्णिका में स्थित तुम्बुरु मन्त्र में कहे गये चार बीजक और नायक ने सहित स्मर को दिग्देशों में लिखे । तुम्बुरु के मध्य में स्मरगत जम्प- दक लिखें और दिग्गत दलों में विद्या लिखे तथा देवी दलों में स्मर को लिखे । कोणस्थों में नाम सहित लिखे । बाहर पाशङ्कज में रत लिखे । यह मन्त्र वश्य करने वाला और ब्रह्मादि के भय के हरने वाला तथा ग्रह अभिचार को हरण करने वाला है। इसका तात्पर्य यह है किदेवी बीज के मध्य में काम बीज और उसका नाम होना चाहिये । इस प्रकार से कोण चतु.दलों में लिखे में तुम्बुरुदेवता है ।३२-३३। हित्वा कामं लिखंत्शास्तिः यन्त्रेऽस्मिम् नृकपालके । सन्ध्यासु तापयेतेतदुच्चैः साध्य वशं नयेत् ।३४ हित्वा शान्ति लिखेद्धर्मं पटे वा नरचर्मणि । वह्नि वायुगृहावोतं स्मशानस्थंपूर्त्ति हरेत् ।३५ त्यक्त्वा वर्म लिखेद्स्त्र' फलकेऽक्षतरूद्भवे । वह्नि वायुयुतं नाम विषाढ्यरुधिरेण तत् ।३६ चत्वरे निखनेद्यन्त्रं विद्वेषं कुरुते मिथः । हित्वा रं ध्यकारौद्वौ लकार मध्यतो लिखेत् ।३७ धरापुरेण बीजं तदिष्टकान्तर्निवेशितम् । सर्वेषां स्तम्भनं कुर्यान्नात्र कार्या विचारणा । अब वश्य प्रयोग बतलाते हैं-काम के पाँच बीजकों का त्याग करके दीर्घ इकार अर्थात् विन्दु के सहित शान्ति को लिखे और शान्ति के स्थान में वर्म अर्थात् हूँ लिखे । मनुष्य के कपाल में इस मन्त्र में लिखना