भारतकोश
शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary

लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा

स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished511 पृष्ठ

पृष्ठ 48, कुल 511 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 48

४४ ] [ श्रीशारदा तिलक न करके जो जड़ पुरुष दूषित मन्त्रों का सेवन किया करता है उसको करोड़ों कल्पों में भी सिद्धि नहीं होती है ।११०। इत्यादिदोषोदुष्टांस्तान्मन्त्रानात्मनि योजयेत् । शोधयेदूर्ध्वपवनोबद्धया योनिमुद्रया ।१११ मन्त्राणां दश संस्काराः कथ्यन्ते सिद्धिदायिन जननं जीवनं पश्चात्ताडनं बोधनं तथा । ११२ तथाभिषेको विमलीकरणाप्यायने पुनः । तर्पणं दीपनं गुप्तिर्दशै या मन्त्रसंस्क्रियाः ।११३ मन्त्राणां मातृकामध्यादुद्धारो जननं स्मृतम् । प्रणवान्तरितान्कृत्वा मन्त्रवर्णाञ्जपेत्सुधीः ।११४ एतज्जीवनमित्याहुर्मन्त्रविशारदाः । मन्त्रवर्णान् समालिख्य ताडयेच्चदनाम्भसा ।११५ इन उक्त दोषों से दूषित उन मन्त्रों को अपनी आत्मामें योजित करना चाहिए । बद्धयोनिमुद्रा के द्वारा ऊर्ध्व पवन द्वारा उनका शोधन करना चाहिए ।१११। मन्त्रों के दश संस्कार बतलाये गये हैं । जो सिद्धि के देने वाले होते है । उनके नाम बतलाते हैं-जनन, जीवन, ताड़न, बोधन, अभिषेक, विमली-करण, आप्यायन, तर्पण, दीपन और गुप्ति- ये दश मन्त्रों के संस्कार होते हैं ।११२-११३। मन्त्रों का मातृका के मध्य से उद्धार करना ही मन्त्रका जनन कहा गया है । प्रणवों को अन्त- रित करके सुधी पुरुष मन्त्र के वर्णों का जाप करे, इसी को वे जीवन संस्कार कहते हैं, जो मन्त्र-तन्त्र के विद्वान् होते हैं । मन्त्र के वर्णों को भली भाँति लिखकर चन्दन के जल के द्वारा ताड़न करना चाहिए, यही मन्त्र का ताड़न संस्कार होता है ।११४-११५। प्रत्येकं वायुना मन्त्री ताडनं तदुदाहृतम् । विलिख्य यन्त्रन्तं मन्त्री प्रसूनैः करवीरकै ।११६ तन्मन्त्राक्षरसंख्यातैर्हन्याच्चैतेन बोधनम् । स्वतन्त्रोक्तविधानेनमन्त्री मन्त्रार्णसंख्ययाः।११७