भारतकोश
शतपथ ब्राह्मण (शुक्ल यजुर्वेद - प्रथम भाग)

शतपथ ब्राह्मण (शुक्ल यजुर्वेद - प्रथम भाग)

Shatapatha Brahmana Part 1 - Shukla Yajurveda

महर्षि याज्ञवल्क्य / सायणभाष्य द्वारा

स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished699 पृष्ठ

पृष्ठ 399, कुल 699 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 399

कां० ३, अ० ३, ब्रा० २-३, कं० १३-१६ व १-३ शतपथब्राह्मण / ३८१ से, फिर दो से, फिर एक से, फिर एक से, फिर दो से, फिर तीन से, फिर चार से, फिर सब से ॥१३॥ वह अँगुलियों को झुकाकर और ऊपर को उठाकर सोम को तोलता है। उठाकर और झुकाकर इसीलिए तोलता है कि अँगुलियों को अलग-अलग मान लेता है। इसीलिए ये अलग- अलग उत्पन्न होती हैं। और सब अँगुलियों से इसलिए तोलता है कि वे संयुक्त उत्पन्न हों। इसीलिए वह अंगुलियों को उठाकर और झुकाकर तोलता है ॥१४॥ अँगुलियों को उठाकर और झुकाकर इसलिए लेता है कि ये भिन्न शक्तिवाली हो जायें। इसीलिए अँगुलियाँ भिन्न-भिन्न शक्तिवाली हैं ॥१५॥ अंगुलियों को उठाने और झुकाने का प्रयोजन यह है कि विराज् (विराज् छन्द को जिसमें दश अक्षर के पद होते हैं) को ले जाता और ले आता है। अर्थात् यज्ञ को पहले देवों के लिए ले जाता है, फिर मनुष्यों के लिए वापस लाता है ॥१६॥ इस बार तोलने का तात्पर्य यह है कि विराट् छन्द में दश अक्षर होते हैं। सोम विराट् के समान है। इसलिए दश बार तोलता है ॥१७॥ सोम-वस्त्र के किनारों को पकड़कर अध्वर्यु उसको पगड़ी से बाँधता है यह पढ़कर— “प्रजाभ्यस्त्वा” (यजु० ४।२५)—“सन्तान के लिए तुझे।” सन्तान के लिए ही सोम को मोल लिया जाता है। शिर और कन्धों के बीच में जो शक्ल होती है वैसी ही बना देता है (अर्थात् सोम की गठरी ऐसी बाँधी जाती है कि लड़के की आकृति हो जाय, सिर निकला रहे) ॥१८॥ अब इस मन्त्र को पढ़कर गांठ में अँगुली जाने के लिए छेद कर देता है—“प्रजास्त्वाऽनु- प्राणन्तु” (यजु० ४।२५), अर्थात् सन्तान तेरे समान प्राण (साँस) लें। जब गाँठ बाँधी तो मानो उसका गला घोंट दिया। वह साँस न ले सका। अब वह इस प्रकार प्राणों को छोड़ता है (साँस को लेता है)। इसी के समान सन्तान भी साँस लेगी। इसीलिए कहा ‘सन्तान तेरे समान साँस लें।’ अब वह उसको सोम बेचनेवाले को दे देता है। अब आगे मोल चुकाने की बात आवेगी ॥१९॥ अध्याय ३—ब्राह्मण ३ सोम राजा के लिए मोल किया जाता है। चूंकि सोम राजा का मोल किया जाता है इसलिए सभी चीजों का मोल करते हैं। पहले सोम बेचनेवाले से पूछता है, ‘क्या सोम राजा बिकाऊ है?’ वह उत्तर देता है, ‘हाँ, बिकाऊ है।’ वह पूछता है, ‘मैं तुझसे मोल लूंगा।’ सोम बेचनेवाला उत्तर देता है, ‘ले लो।’ अध्वर्यु कहता है कि, ‘कला (गौ के सोलहवें भाग) के बदले सोम को लूंगा।’ सोम बेचनेवाला कहता है, ‘सोम राजा का मोल इससे अधिक है।’ अध्वर्यु कहता है कि ‘निस्सन्देह सोम राजा का मोल इससे अधिक है, परन्तु गाय की महिमा भी तो अधिक है’ ॥१॥ गाय से दूध मिलता है, उसी से शृत, उसी से मलाई, उसी से दही, उसी से मस्तु, आतंचन, नवनीत, घी, आमिक्षा और वाजी। (ये सब दूध से बनी चीजों के नाम हैं) ॥२॥ ‘मैं गाय के एक शफ (खुर) के बदले इसको मोल लूंगा।’ सोम बेचनेवाला कहता है,

शतपथ ब्राह्मण (शुक्ल यजुर्वेद - प्रथम भाग) · पृष्ठ 399, कुल 699 में से · BharatKosha