शतपथ ब्राह्मण (शुक्ल यजुर्वेद - प्रथम भाग)
Shatapatha Brahmana Part 1 - Shukla Yajurveda
महर्षि याज्ञवल्क्य / सायणभाष्य द्वारा
स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान · 1950 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंकां० ४, अ० ५, ब्रा० ६-१०, कं० ६-१३ व १-७ शतपथब्राह्मण / ६५५ जाय। यदि रख देगा तो अवश्य ही प्राणों में विक्षोभ उत्पन्न कर देगा। उसको लिये-लिये बैठे रहते हैं और अध्वर्यु अन्य ग्रहों को लेता रहता है। जब पारी आती है तो उस-उस ग्रह को हिंकार बोलकर रख देता है ॥६॥ कुछ लोग कहते हैं कि ग्रहों का क्रम नहीं बदलना चाहिए। ग्रह प्राण हैं। कहीं ऐसा न हो कि प्राणों का क्रम बदल जाय। जब इनके ग्रहों का क्रम बदलेगा तो प्राणों में अवश्य ही विक्षोभ होगा। इसलिए ग्रहों के क्रम को न बदले ॥१०॥ परन्तु उसको बदल देना चाहिए, क्योंकि ग्रह अंग हैं और सोते में इच्छा होती है कि अंगों को एक ओर से दूसरी ओर को फेरा जाय। इसलिए क्रम को बदल देना उचित है ॥११॥ उनको कभी न बदलें। ग्रह प्राण हैं। कहीं प्राणों में गड़बड़ न हो जाय। क्योंकि जब वह ग्रहों को बदलेगा तो अवश्य ही प्राणों में गड़बड़ होगी। इसलिए न बदलना चाहिए ॥१२॥ अच्छा, जब उद्गाता और होता छन्दों के क्रम को बदलें तो अध्वर्यु क्या करे? प्रातः- सवन में वह ऐन्द्रवायव ग्रह को लेता है, दोपहर के सवन में शुक्र ग्रह को और तीसरे सवन में आग्रयण ग्रह को। इस प्रकार अध्वर्यु ग्रहों के क्रम को बदल देता है ॥१३॥ सोमापहरणादि अध्याय ५—ब्राह्मण १० यदि सोम चोरी जाय तो कहना चाहिए कि 'दौड़ो और तलाश करो।' यदि मिल जाय तो अच्छा ही है। परन्तु यदि न मिले तो इस प्रकार इसका प्रायश्चित्त हो जाता है ॥१॥ फाल्गुन वृक्ष दो प्रकार का होता है—लोहित-पुष्प और अरुण-पुष्प। जो अरुण-पुष्प फाल्गुन हों उनको निचोड़े, क्योंकि जो अरुण-पुष्प के फाल्गुन हैं वे सोम के समान होते हैं। इसलिए उन्हीं फाल्गुनों को पीसना चाहिए जिनके अरुण-पुष्प हों ॥२॥ यदि अरुण फूलवाले न मिलें तो श्येनहृत वृक्ष को निचोड़ना चाहिए। जब गायत्री सोम को लेने के लिए उड़ी और ला रही थी तो सोम की एक डाली उससे गिर पड़ी, वही श्येनहृत वृक्ष बन गई। इसीलिए श्येनहृत वृक्ष को निचोड़ना चाहिए ॥३॥ यदि श्येनहृत भी न मिले तो आदार वृक्ष को लेना चाहिए। जब यज्ञ का शिर काटा गया तो उससे जो रस बहा उससे आदार वृक्ष उगा। इसलिए आदार वृक्ष को निचोड़ना चाहिए ॥४॥ यदि आदार वृक्ष न मिले तो अरुण दूर्वा को पीसे। अरुण दूर्वा सोम के सदृश होती है। इसलिए अरुण दूर्वा को पीसना चाहिए ॥५॥ यदि अरुण दूर्वा न मिले तो कैसे ही हरित कुशों को पीस डाले। परन्तु एक गाय भी दान करे और अवभृथ स्नान के पीछे दीक्षा भी ले। सोम के चोरी जाने का यही प्रायश्चित्त है कि यह दूसरा यज्ञ रचा जाय ॥६॥ जिनका कलश टूट जाय उनका क्या कहना? जब कलश टूट जाय तो कहना चाहिए कि 'इसे पकड़ो।' यदि मुट्ठी-भर या पसों-भर सोम मिल जाय तो एक-धन पात्र से पानी मिलाकर यथाशक्ति काम निकालना चाहिए। परन्तु यदि कुछ भी न मिल सके तो आग्रयण में से कुछ लेकर दूसरे एक-धन पात्रों में से पानी मिलाकर यथाशक्ति काम निकालना चाहिए। यदि