भारतकोश
शिव पुराण

शिव पुराण

Shiva Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished850 पृष्ठ

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( १७ )

विषयपृष्ठ-संख्याविषयपृष्ठ-संख्या
आज्ञा माँगना और शिवद्वारा उन्हें अकेले ही आनेकी आज्ञा देना .................................२६३६७-भगवान् शिवका अपने परम सुन्दर दिव्य रूपको प्रकट करना, गंगा-यमुनाका उन्हें सुन्दर चँवर डुलाना, आठों सिद्धियोंका उनके आगे नाचना तथा सिद्ध, उपदेवता, समस्त मुनियोंका वररूपमें शोभित शिवके साथ प्रसन्नतापूर्वक यात्रा करना... ......................................३२७
५६-इन्द्रद्वारा अपना स्मरण किये जानेपर कामदेवका तत्काल ही उनके सामने आ पहुँचना... .....२६९६८-केलिगृहमें नूतन दम्पति शिव-पार्वतीको देखनेके लिये सोलह दिव्य नारियों—सरस्वती आदिका प्रवेश तथा रत्नमय सिंहासनपर नवदम्पतिके विराजमान होनेपर भगवान् शिवके सामने रतिका हाथ जोड़कर अपने पति (कामदेव)-को जीवित करनेकी प्रार्थना करना... ..................३३६
५७-रुद्रकी नेत्राग्निसे कामदेवका भस्म होना... ....२७१६९-मेनाके मनोभावको जानकर एक सती-साध्वी ब्राह्मणपत्नीद्वारा गिरिजाको उत्तम पातिव्रत्यकी शिक्षाका उपदेश... ..................................३४५
५८-शिवकी क्रोधाग्निको बड़वानलकी संज्ञा देकर—घोड़ेके रूपमें परिवर्तित कर ब्रह्माका उसको स्थापित करनेके लिये समुद्रतटपर जाना तथा समुद्रका साक्षात् प्रकट होकर उनकी स्तुति कर आनेका कारण पूछना... .........................२७४७०-ब्रह्माजीकी सत्प्रेरणासे स्वामी कार्तिकका विमानसे उतरकर हाथमें अपनी चमकीली शक्तिको लेकर तारक-असुरकी ओर पैदल दौड़ पड़ना... .........................................३५२
५९-शिवकी आराधनाके लिये पार्वतीकी दुष्कर तपस्या तथा उनके तपके प्रभावसे उस स्थलपर विचरण करनेवाले एक-दूसरेके विरोधी सिंह, गौ, चूहे, बिल्ली आदिका पारस्परिक विरोधका त्याग कर देना तथा वृक्षोंका सदा फलसे लदा रहना... ................................२७८७१-तारक-असुरका हनन करनेवाले कुमार स्कन्द (कार्तिक)-का देवताओंके साथ विमानमें बैठकर शिवजीके समीप कैलास पहुँचना... ..........३५४
६०-भगवान् शिवकी आज्ञासे सप्तर्षियोंका तपस्यामें तत्पर पार्वतीके आश्रमपर जाकर उनके शिवविषयक अनुरागकी परीक्षा करना... .......२८७७२-सखियोंके समझानेपर पार्वतीद्वारा अपनी ही आज्ञामें तत्पर रहनेवाले चेतन पुरुष (गणेश)-का अपने शरीरकी मैलसे निर्माण करना तथा उन्हें अपना पुत्र कहकर द्वारपालके पदपर नियुक्त करना.................................३५७
६१-परीक्षाके बहाने जटिल तपस्वी ब्राह्मणके वेषमें पधारे हुए शंकरके सामने ही पार्वतीका अग्निमें प्रवेश करना तथा उनकी तपस्याके प्रभावसे आगका उसी क्षण चन्दन-पंकके समान शीतल हो जाना और पार्वतीका आकाशमें ऊपरकी ओर उठने लगना... .................................२९०७३-द्वारपालके पदपर नियुक्त गणेशसे शिवजीका लीलापूर्वक अपने गणों और देवताओंका युद्ध करना तथा उनके पराजित न होनेपर शूलपाणिका स्वयं आकर घोर युद्धके पश्चात् त्रिशूलसे उनका (गणेशका) मस्तक काट देना तथा समाचार पाकर स्नानमें सखियोंसहित तत्पर पार्वतीका घटनास्थलपर आकर बहुत-सी शक्तियोंको उत्पन्न कर उन्हें प्रलय करनेकी आज्ञा देना तथा शिवगणोंका भयभीत होकर दूर भाग खड़ा होना... ...................३५८
६२-बायें हाथमें सींग और दाहिने हाथमें डमरू लेकर पीठपर कथरी रखकर तथा लाल वस्त्र पहनकर शिवजीका नटके वेषमें मेनकाके पास जाना तथा मेनकाके पास बैठी हुई स्त्रियोंकी टोलीके समीप उनका सुन्दर नृत्य करना... ..२९९७४-देवताओंद्वारा शिवके स्मरणपूर्वक वेदमन्त्रद्वारा जलको अभिमन्त्रित कर बालक (गणेश)-के शरीरपर छिड़का जाना तथा जलके स्पर्शसे बालकका शिवेच्छासे चेतनायुक्त होकर जीवित हो जाना तथा सोये हुएकी तरह उठ बैठना...३६०
६३-देवताओंके अनुरोधसे वैष्णव ब्राह्मणके वेषमें शिवजीका हिमवान्‌के घर जाना और शिवकी निन्दा करके पार्वतीका विवाह उनके साथ न करनेको कहना.......................................३०२७५-ब्रह्मा, विष्णु और शंकर आदि देवताओंका
६४-वसिष्ठ आदि सप्तर्षियों तथा मेरु आदि पर्वतोंके समझानेपर मेना और हिमवान्‌का प्रसन्नतापूर्वक शिवके साथ पार्वतीके विवाहका निश्चय करना...३०७
६५-मेनाका विलाप करना तथा अपनी पुत्री पार्वती और नारदको दुर्वचन सुनाना और धिक्कारना...३२३
६६-सप्तर्षियोंके समझानेपर भी मेनाका शिवके साथ पार्वतीका विवाह न करनेका ही हठ करना तथा हिमवान्‌का उन्हें समझाना और शिवके पूजनीय स्वरूपका वर्णन करना... ......३२४
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