शिव पुराण
Shiva Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२२२ * संक्षिप्त शिवपुराण *
वीरभद्रने प्रस्थान किया, तब उधर दक्ष तथा देवताओंको बहुत-से अशुभ लक्षण दिखायी देने लगे। देवर्षे यज्ञ-विध्वंसकी सूचना देनेवाले त्रिविध उत्पात प्रकट होने लगे। दक्षकी बायीं आँख, बायीं भुजा और बायीं जाँघ फड़कने लगी। तात! वाम अंगोंका वह फड़कना सर्वथा अशुभसूचक था और नाना प्रकारके कष्ट मिलनेकी सूचना दे रहा था। उस समय दक्षकी यज्ञशालामें धरती डोलने लगी। दक्षको दोपहरके समय दिनमें ही अद्भुत तारे दीखने लगे। दिशाएँ मलिन हो गयीं। सूर्यमण्डल चितकबरा दीखने लगा। उसपर हजारों घेरे पड़ गये, जिससे वह भयंकर जान पड़ता था। बिजली और अग्निके समान दीप्तिमान् तारे टूट-टूटकर गिरने लगे तथा और भी बहुत-से भयानक अपशकुन होने लगे।
इसी बीचमें वहाँ आकाशवाणी प्रकट हुई जो सम्पूर्ण देवताओं और विशेषतः दक्षको अपनी बात सुनाने लगी।
आकाशवाणी बोली—ओ दक्ष! आज तेरे जन्मको धिक्कार है! तू महामूढ़ और पापात्मा है। भगवान् हरकी ओरसे आज तुझे महान् दुःख प्राप्त होगा, जो किसी तरह टल नहीं सकता। अब यहाँ तेरा हाहाकार भी नहीं सुनायी देगा। जो मूढ़ देवता आदि तेरे यज्ञमें स्थित हैं, उनको भी महान् दुःख होगा—इसमें संशय नहीं है।
ब्रह्माजी कहते हैं—मुने! आकाशवाणीकी यह बात सुनकर और पूर्वोक्त अशुभसूचक लक्षणोंको देखकर दक्ष तथा दूसरे देवता आदिको भी अत्यन्त भय प्राप्त हुआ। उस समय दक्ष मन-ही-मन अत्यन्त व्याकुल हो काँपने लगे और अपने प्रभु लक्ष्मीपति भगवान् विष्णुकी शरणमें गये। वे भयसे अधीर हो बेसुध हो रहे थे। उन्होंने स्वजनवत्सल देवाधिदेव भगवान् विष्णुको प्रणाम किया और उनकी स्तुति करके कहा।
(अध्याय ३३-३४)
### दक्षके यज्ञकी रक्षाके लिये भगवान् विष्णुसे प्रार्थना, भगवान्का शिवद्रोहजनित संकटको टालनेमें अपनी असमर्थता बताते हुए दक्षको समझाना तथा सेनासहित वीरभद्रका आगमन
दक्ष बोले—देवदेव! हरे! विष्णो! दीनबन्धो! कृपानिधे! आपको मेरी और मेरे यज्ञकी रक्षा करनी चाहिये। प्रभो! आप ही यज्ञके रक्षक हैं, यज्ञ ही आपका कर्म है और आप यज्ञस्वरूप हैं। आपको ऐसी कृपा करनी चाहिये, जिससे यज्ञका विनाश न हो।
ब्रह्माजी कहते हैं—मुनीश्वर! इस तरह अनेक प्रकारसे सादर प्रार्थना करके दक्ष भगवान् श्रीहरिके चरणोंमें गिर पड़े। उनका चित्त भयसे व्याकुल हो रहा था। तब जिनके मनमें घबराहट आ गयी थी, उन प्रजापति दक्षको उठाकर और उनकी पूर्वोक्त बात सुनकर भगवान् विष्णुने देवाधिदेव शिवका स्मरण किया। अपने प्रभु एवं महान् ऐश्वर्यसे युक्त परमेश्वर शिवका स्मरण करके