भारतकोश
शिव पुराण

शिव पुराण

Shiva Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

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पृष्ठ 459

* शतरुद्रसंहिता * ४४५

करूँगा और उस कलियुगमें निवृत्तिमार्गको सुदृढ़ बनाऊँगा। चौथे द्वापरमें जब अंगिरा व्यास कहे जायँगे, उस समय मैं सुहोत्र नामसे अवतार लूँगा। उस समय भी मेरे चार योगसाधक महात्मा पुत्र होंगे। ब्रह्मन्! उनके नाम होंगे—सुमुख, दुर्मुख, दुर्दम और दुरतिक्रम। उस अवसरपर भी इन शिष्योंके साथ मैं व्यासकी सहायतामें लगा रहूँगा। पाँचवें द्वापरमें सविता व्यास नामसे कहे जायँगे। तब मैं कंक नामक महातपस्वी योगी होऊँगा। ब्रह्मन्! वहाँ भी मेरे चार योगसाधक महात्मा पुत्र होंगे। उनके नाम बतलाता हूँ, सुनो—सनक, सनातन, प्रभावशाली सनन्दन और सर्वव्यापक निर्मल तथा अहंकाररहित सनत्कुमार। उस समय भी कंक नामधारी मैं सविता नामक व्यासका सहायक बनूँगा और निवृत्तिमार्गको बढ़ाऊँगा। पुनः छठे द्वापरके प्रवृत्त होनेपर जब मृत्यु लोककारक व्यास होंगे और वेदोंका विभाजन करेंगे, उस समय भी मैं व्यासकी सहायता करनेके लिये लोकाक्षि नामसे प्रकट होऊँगा और निवृत्ति-पथकी उन्नति करूँगा। वहाँ भी मेरे चार दृढ़व्रती शिष्य होंगे। उनके नाम होंगे—सुधामा, विरजा, संजय तथा विजय। विधे! सातवें द्वापरके आरम्भमें जब शतक्रतु नामक व्यास होंगे, उस समय भी मैं योगमार्गमें परम निपुण जैगीषव्य नामसे प्रकट होऊँगा और काशीपुरीमें गुफाके अंदर दिव्यदेशमें कुशासनपर बैठकर योगको सुदृढ़ बनाऊँगा तथा शतक्रतु नामक व्यासकी सहायता और संसारभयसे भक्तोंका उद्धार करूँगा। उस युगमें भी मेरे सारस्वत, योगीश, मेघवाह और सुवाहन नामक चार पुत्र होंगे। आठवें द्वापरके आनेपर मुनिवर वसिष्ठ वेदोंका विभाजन करनेवाले वेदव्यास होंगे। योगवित्तम! उस युगमें भी मैं दधिवाहन नामसे अवतार लूँगा और व्यासकी सहायता करूँगा। उस समय कपिल, आसुरि, पंचशिख और शाल्वल नामवाले मेरे चार योगी पुत्र उत्पन्न होंगे, जो मेरे ही समान होंगे। ब्रह्मन्! नवीं चतुर्युगीके द्वापरयुगमें मुनिश्रेष्ठ सारस्वत व्यास नामसे प्रसिद्ध होंगे। उन व्यासके निवृत्तिमार्गकी वृद्धिके लिये ध्यान करनेपर मैं ऋषभनामसे अवतार लूँगा। उस समय पराशर, गर्ग, भार्गव तथा गिरीश नामके चार महायोगी मेरे शिष्य होंगे। प्रजापते! उनके सहयोगसे मैं योगमार्गको सुदृढ़ बनाऊँगा। सन्मुने! इस प्रकार मैं व्यासका सहायक बनूँगा। ब्रह्मन्! उसी रूपसे मैं बहुत-से दुःखी भक्तोंपर दया करके उनका भवसागरसे उद्धार करूँगा। मेरा वह ऋषभ नामक अवतार योगमार्गका प्रवर्तक, सारस्वत व्यासके मनको संतोष देनेवाला और नाना प्रकारसे रक्षा करनेवाला होगा। उस अवतारमें मैं भद्रायु नामक राजकुमारको, जो विषदोषसे मर जानेके कारण पिताद्वारा त्याग दिया जायगा, जीवन प्रदान करूँगा। तदनन्तर उस राजपुत्रकी आयुके सोलहवें वर्षमें ऋषभ ऋषि, जो मेरे ही अंश हैं, उसके घर पधारेंगे। प्रजापते! उस राजकुमारद्वारा पूजित होनेपर वे सद्रूपधारी कृपालु मुनि उसे राजधर्मका उपदेश करेंगे। तत्पश्चात् वे दीनवत्सल मुनि हर्षित चित्तसे उसे दिव्य कवच, शंख और सम्पूर्ण शत्रुओंका विनाश करनेवाला एक चमकीला खड्ग प्रदान करेंगे। फिर कृपापूर्वक उसके शरीरपर