शिव पुराण
Shiva Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें५५६ * संक्षिप्त शिवपुराण *
७४७ धर्मकृद्धर्मसम्भवः—धर्मके पालक और उत्पादक, ७४८ दम्भः—मायामयरूपधारी, ७४९ अलोभः—लोभरहित, ७५० अर्थविच्छम्भुः—सबके प्रयोजनको जाननेवाले कल्याणनिकेतन शिव, ७५१ सर्वभूतमहेश्वरः—सम्पूर्ण प्राणियोंके परमेश्वर॥ ९७॥
श्मशाननिलयस्त्र्यक्षः सेतुरप्रतिमाकृतिः।
लोकोत्तरस्फुटालोकस्त्र्यम्बको नागभूषणः॥ ९८॥
७५२ श्मशाननिलयः—श्मशानवासी, ७५३ त्र्यक्षः—त्रिनेत्रधारी, ७५४ सेतुः—धर्ममर्यादाके पालक, ७५५ अप्रतिमाकृतिः—अनुपम रूपवाले, ७५६ लोकोत्तरस्फुटालोकः—अलौकिक एवं सुस्पष्ट प्रकाशसे युक्त, ७५७ त्र्यम्बकः—त्रिनेत्रधारी अथवा त्र्यम्बक नामक ज्योतिर्लिंग, ७५८ नागभूषणः—नागहारसे विभूषित॥ ९८॥
अन्धकारिर्मखद्वेषी विष्णुकन्धरपातनः।
हीनदोषोऽक्षयगुणो दक्षारिः पूषदन्तभित्॥ ९९॥
७५९ अन्धकारिः—अन्धकासुरका वध करनेवाले, ७६० मखद्वेषी—दक्षके यज्ञका विध्वंस करनेवाले, ७६१ विष्णुकन्धरपातनः—यज्ञमय विष्णुका गला काटनेवाले, ७६२ हीनदोषः—दोषरहित, ७६३ अक्षयगुणः—अविनाशी गुणोंसे सम्पन्न, ७६४ दक्षारिः—दक्षद्रोही, ७६५ पूषदन्तभित्—पूषा देवताके दाँत तोड़नेवाले॥ ९९॥
धूर्जटिः खण्डपरशुः सकलो निष्कलोऽनघः।
अकालः सकलाधारः पाण्डुराभो मृडो नटः॥ १००॥
७६६ धूर्जटिः—जटाके भारसे विभूषित, ७६७ खण्डपरशुः—खण्डित परशुवाले, ७६८ सकलो निष्कलः—साकार एवं निराकार परमात्मा, ७६९ अनघः—पापके स्पर्शसे शून्य, ७७० अकालः—कालके प्रभावसे रहित, ७७१ सकलाधारः—सबके आधार, ७७२ पाण्डुराभः—श्वेत कान्तिवाले, ७७३ मृडो नटः—सुखदायक एवं ताण्डवनृत्यकारी॥ १००॥
पूर्णः पूरयिता पुण्यः सुकुमारः सुलोचनः।
सामगेयप्रियोऽक्रूरः पुण्यकीर्तिरनामयः॥ १०१॥
७७४ पूर्णः—सर्वव्यापी परब्रह्म परमात्मा, ७७५ पूरयिता—भक्तोंकी अभिलाषा पूर्ण करनेवाले, ७७६ पुण्यः—परम पवित्र, ७७७ सुकुमारः—सुन्दर कुमार हैं जिनके, ऐसे, ७७८ सुलोचनः—सुन्दर नेत्रवाले, ७७९ सामगेयप्रियः—सामगानके प्रेमी, ७८० अक्रूरः—क्रूरतारहित, ७८१ पुण्यकीर्तिः—पवित्र कीर्तिवाले, ७८२ अनामयः—रोग-शोकसे रहित॥ १०१॥
मनोजवस्तीर्थकरो जटिलो जीवितेश्वरः।
जीवितान्तकरो नित्यो वसुरेता वसुप्रदः॥ १०२॥
७८३ मनोजवः—मनके समान वेगशाली, ७८४ तीर्थकरः—तीर्थोंके निर्माता, ७८५ जटिलः—जटाधारी, ७८६ जीवितेश्वरः—सबके प्राणेश्वर, ७८७ जीवितान्तकरः—प्रलयकालमें सबके जीवनका अन्त करनेवाले, ७८८ नित्यः—सनातन, ७८९ वसुरेताः—सुवर्णमय वीर्यवाले, ७९० वसुप्रदः—धनदाता॥ १०२॥
सद्गतिः सत्कृतिः सिद्धिः सज्जातिः खलकण्टकः।
कलाधरो महाकालभूतः सत्यपरायणः॥ १०३॥
७९१ सद्गतिः—सत्पुरुषोंके आश्रय, ७९२ सत्कृतिः—शुभ कर्म करनेवाले, ७९३ सिद्धिः—सिद्धिस্বরূপ, ७९४ सज्जातिः—सत्पुरुषोंके जन्मदाता, ७९५ खलकण्टकः—दुष्टोंके लिये कण्टकरूप, ७९६ कलाधरः—कलाधारी, ७९७ महाकालभूतः—महाकाल नामक ज्योतिर्लिंगस्वरूप अथवा