भारतकोश
शिव पुराण

शिव पुराण

Shiva Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished850 पृष्ठ

पृष्ठ 576, कुल 850 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 576

५६२ * संक्षिप्त शिवपुराण *

वहीं अन्तर्धान हो गये। भगवान् विष्णु भी शंकरजीके वचनसे तथा उस शुभ चक्रको पा जानेसे मन-ही-मन बड़े प्रसन्न हुए। फिर वे प्रतिदिन शम्भुके ध्यानपूर्वक इस स्तोत्रका पाठ करने लगे। उन्होंने अपने भक्तोंको भी इसका उपदेश दिया। तुम्हारे प्रश्नके अनुसार मैंने यह प्रसंग सुनाया है, जो श्रोताओंके पापको हर लेनेवाला है। अब और क्या सुनना चाहते हो?

(अध्याय ३५-३६)


भगवान् शिवको संतुष्ट करनेवाले व्रतोंका वर्णन, शिवरात्रि-व्रतकी विधि एवं महिमाका कथन

तदनन्तर ऋषियोंके पूछनेपर सूतजीने शिवजीकी आराधनाके द्वारा उत्तम एवं मनोवांछित फल प्राप्त करनेवाले बहुत-से महान् स्त्री-पुरुषोंके नाम बताये। इसके बाद ऋषियोंने फिर पूछा—'व्यासशिष्य! किस व्रतसे संतुष्ट होकर भगवान् शिव उत्तम सुख प्रदान करते हैं? जिस व्रतके अनुष्ठानसे भक्तजनोंको भोग और मोक्षकी प्राप्ति हो सके, उसका आप विशेषरूपसे वर्णन कीजिये।'

सूतजीने कहा—महर्षियो! तुमने जो कुछ पूछा है, वही बात किसी समय ब्रह्मा, विष्णु तथा पार्वतीजीने भगवान् शिवसे पूछी थी। इसके उत्तरमें शिवजीने जो कुछ कहा, वह मैं तुमलोगोंको बता रहा हूँ।

भगवान् शिव बोले—मेरे बहुत-से व्रत हैं, जो भोग और मोक्ष प्रदान करनेवाले हैं। उनमें मुख्य दस व्रत हैं, जिन्हें जाबालश्रुतिके विद्वान् 'दश शैवव्रत' कहते हैं। द्विजोंको सदा यत्नपूर्वक इन व्रतोंका पालन करना चाहिये। हरे! प्रत्येक अष्टमीको केवल रातमें ही भोजन करे। विशेषतः कृष्ण-पक्षकी अष्टमीको भोजनका सर्वथा त्याग कर दे। शुक्लपक्षकी एकादशीको भी भोजन छोड़ दे। किंतु कृष्णपक्षकी एकादशीको रातमें मेरा पूजन करनेके पश्चात् भोजन किया जा सकता है। शुक्लपक्षकी त्रयोदशी-को तो रातमें भोजन करना चाहिये; परंतु कृष्णपक्षकी चतुर्दशीको शिवव्रतधारी पुरुषोंके लिये भोजनका सर्वथा निषेध है। दोनों पक्षोंमें प्रत्येक सोमवारको प्रयत्नपूर्वक केवल रातमें ही भोजन करना चाहिये। शिवके व्रतमें तत्पर रहनेवाले लोगोंके लिये यह अनिवार्य नियम है। इन सभी व्रतोंमें व्रतकी पूर्तिके लिये अपनी शक्तिके अनुसार शिवभक्त ब्राह्मणोंको भोजन कराना चाहिये। द्विजोंको इन सब व्रतोंका नियमपूर्वक पालन करना चाहिये। जो द्विज इनका त्याग करते हैं, वे चोर होते हैं। मुक्तिमार्गमें प्रवीण पुरुषोंको मोक्षकी प्राप्ति करानेवाले चार व्रतोंका नियमपूर्वक पालन करना चाहिये। वे चार व्रत इस प्रकार हैं—भगवान् शिवकी पूजा, रुद्रमन्त्रोंका जप, शिवमन्दिरमें उपवास तथा काशीमें मरण। ये मोक्षके सनातन मार्ग हैं। सोमवारकी अष्टमी और कृष्णपक्षकी चतुर्दशी—इन दो तिथियोंको उपवासपूर्वक व्रत रखा जाय तो वह भगवान् शिवको संतुष्ट करनेवाला होता