भारतकोश
शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

Shiva Samhita with Hindi Commentary

भगवान् शिव / पं. मिहिरचन्द्र द्वारा

DevanagariSanskritpublished216 पृष्ठ

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चतुर्थपटलः । ( ९९ ) प्यहै पहिले वामांगसे अभ्यास करके फिर दक्षिण अं- गसे अभ्यास करे योगी स्थिरबुद्धिको उचित है कि, इस प्रकारसे प्राणायामको समकरे ॥२७॥२८॥२९॥३०॥ मूलम्--अनेन विधिना योगी मन्दभाग्यो- ऽपि सिध्यति॥ सर्वासामेव नाडीनां चालनं बिन्दुमारणम् ॥३१॥जीवनन्तु कपायस्य पातकानां विनाशनम् ॥ कुण्डलीतापनं वायोर्ब्रह्मरन्ध्रप्रवेशनम् ॥ ३२ ॥ सर्वरो- गोपशमनं जठराग्निविवर्धनम् ॥ वपुषा कान्तिममलांजरामृत्युविनाशनम्॥ ३३॥ वांछितार्थफलं सौख्यमिन्द्रियाणाञ्च मा- रणम्॥ एतदुक्तानि सर्वाणि योगारूढस्य योगिनः ॥ ३४ ॥ भवेदभ्यासतोऽवश्यं नात्र कार्या विचारणा ॥ टीका-इस विधानसे मन्दभाग्य योगीभी सिद्ध होजा- यगा और इस महामुद्राके प्रभावसे सर्व नाडीका च- लन सिद्ध होजायगा और बिन्दु स्थिर होगा और जी- वनको आकर्षित रक्खेगा और सर्व पातकका नाश हो- जायगा और कुण्डलिनीको हठात् उठाय वायुको ब्रह्मर- न्ध्रमें प्रवेश करेगा और ज़ठराग्नि प्रज्वलित होके सर्वरो-