भारतकोश
शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

Shiva Samhita with Hindi Commentary

भगवान् शिव / पं. मिहिरचन्द्र द्वारा

DevanagariSanskritpublished216 पृष्ठ

पृष्ठ 126, कुल 216 में से

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पृष्ठ 126

( १२२) शिवसंहिता भाषाटीकासमेता । लीं दृढाम्॥ अपानवायुमारुह्य बलादाकृ- ष्य बुद्धिमान् ॥ १०५ ॥ शक्तिचालनमु- द्रेयं सर्वशक्तिप्रदायिनी ॥ १०६ ॥ टीका-आधारकमलमें घोर निद्रित कुण्डलिनीको बुद्धिमान् अपानवायुपर आरूढहोके आकर्षणपूर्वक हठात् चलावे अर्थात् भ्रमावे यह शक्तिचालनमुद्रा सर्वशक्तिकी दाता है ॥ १०५ ॥ १०६ ॥ मूलम्-शक्तिचालनमेवं हि प्रत्यहं यः स- माचरेत् ॥ आयुर्वृद्धिर्भवेत्तस्य रोगाणां च विनाशनम् ॥ १०७ ॥ टीका-यह शक्तिचालनमुद्रा जो प्रतिदिन करे तो उसके आयुकी वृद्धी होगी और सर्वरोगोंका इस मुद्राके प्रभावसे नाश होजायगा ॥ १०७ ॥ मूलम्-विहाय निद्रां भुजगी स्वयमूर्ध्वं भवेत्खलु ॥ तस्मादभ्यासनं कार्यं योगि- ना सिद्धिमिच्छता ॥ १०८ ॥ टीका-इस शक्तिचालनके साधनसे कुण्डलिनी नि- द्राको त्यागके आपही ऊर्ध्वगामी होजायगी यह नि- श्चय है. इस हेतुसे सिद्धिकी इच्छा करनेवाले योगीको उचित है कि, इसका अभ्यास करे ॥ १०८ ॥

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