भारतकोश
शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

Shiva Samhita with Hindi Commentary

भगवान् शिव / पं. मिहिरचन्द्र द्वारा

DevanagariSanskritpublished216 पृष्ठ

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चतुर्थपटलः । ( १२३) मूलम्-यः करोति सदाभ्यासं शक्तिचाल- नमुत्तमम् ॥ येन विग्रहसिद्धिः स्यादाणि- मादिगुणप्रदा ॥ गुरूपदेशविधिना तस्य मृत्युभयं कुतः ॥ १०९ ॥ टीका-यदि इस उत्तमशक्तिचालनमुद्राका सदा अभ्यासकरे तो उसका शरीर सिद्ध अर्थात् अमर हो- जायगा और यह मुद्रा अणिमादिक सिद्धिकी दाता है. गुरूके उपदेशपूर्वक विधानसे जो इसका अभ्यास करे तो उसको मृत्युका भय नहीं है ॥ १०९ ॥ मूलम्-मुहूर्तद्वयपर्यन्तं विधिना शक्ति- चालनम् ॥ ११० ॥ यः करोति प्रयत्नेन त- स्य सिद्धिरदूरतः ॥ युक्तासनेन कर्तव्यं योगिभिः शक्तिचालनम् ॥ १११ ॥ टीका-जो विधानपूर्वक यत्नसे यदि दोमुहूर्तपर्यंत शक्तिचालन करे तो उसको सर्वसिद्धिकी प्राप्ति होगी. योगीको उचित है कि, गुरुके उपदेशानुसार योगासनसे युक्त होके शक्तिचालनका अभ्यास करे ॥११०॥१११॥ मूलम्-एतत्सुमुद्रादशकं न भूतं न भविष्य- ति ॥ एकैकाभ्यासने सिद्धिः सिद्धो भव- ति नान्यथा ॥ ११२ ॥