शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)
Shiva Samhita with Hindi Commentary
भगवान् शिव / पं. मिहिरचन्द्र द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( १२४ ) शिवसंहिता भाषाटीकासमेता । टीका-हे पार्वती! यह दशमुद्रा जो हमने कहा है इसके समान न कुछ भया है न होगा इसके एक एकके अ- भ्यास सिद्ध होनेसे साधक सिद्ध होजायगा ॥ ११२ ॥ इति श्रीशिवसंहितायां हरगौरीसंवादे मुद्राकथनं नाम चतुर्थपटलः समाप्तः ॥ ४ ॥ अथ पञ्चमः पटलः । मूलम्-श्रीदेव्युवाच ॥ ब्रूहि मे वाक्यमी- शान परमार्थधियं प्रति॥ ये विघ्नाः सन्ति लोकानां वद मे प्रिय शङ्कर ॥ १ ॥ टीका-श्रीपार्वतीजी कहती है कि, हेईश्वर ! हे प्रिय शङ्कर ! योगाभ्यासी लोगोंके प्रति जो विघ्न संसारमें हैं सो भक्तोंपर कृपा करके हमको कहो ॥ १ ॥ मूलम्-ईश्वर उवाच ॥ शृणु देवि प्रवक्ष्या- मि यथा विघ्नाः स्थिताः सदा ॥ मुक्तिं प्र- ति नराणाञ्च भोगः परमबन्धनः ॥ २ ॥ टीका-श्रीईश्वर कहते हैं कि, हे देवी ! योगसाधनमें जो विघ्न हैं सो हम कहते हैं सुनो मनुष्योंके मुक्तिके प्रति भोग परमबन्धन है ॥ २ ॥ अथ भोगरूपयोगविघ्नविद्याकथनम् ॥ मूलम्-नारी शय्याऽसनं वस्त्रं धनमस्य विड-