भारतकोश
शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

Shiva Samhita with Hindi Commentary

भगवान् शिव / पं. मिहिरचन्द्र द्वारा

DevanagariSanskritpublished216 पृष्ठ

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( १२६ ) शिवसंहिता भाषाटीकासमेता । नमिन्द्रियनिग्रहः॥६॥ध्येयो ध्यानं तथा मन्त्रो दानं ख्यातिर्दिशासु च ॥ वापीकूप- तडागादिप्रासादारामकल्पना ॥७॥ यज्ञं चान्द्रायणं कृच्छ्रं तीर्थानि विविधानि च॥ दृश्यन्ते च इमे विघ्ना धर्मरूपेण सं- स्थिताः ॥ ८ ॥ टीका-स्नानविधि पूजा होम और सुखपूर्वक स्थिति व्रत उपवास नियम मौन इन्द्रियनिग्रह ध्येय किसीका ध्यान करना मन्त्र जप दान सर्वत्र प्रसिद्धहोना वावडी कूप तालाब मंदिर बगीचाआदिक बनवाना यज्ञ करना पापक्षयके हेतु चांद्रायण कृच्छ्र व्रत करना तीर्थों में भ्रमण करना यह सब धर्मरूप विघ्न हैं ॥ ६॥७॥८॥ अथ ज्ञानरूपविघ्नकथनम् । मूलम्-यत्तु विघ्नंभवेज्ज्ञानं कथयामि वरा- नने ॥ ९॥ गोमुखं स्वासनं कृत्वा धौति- प्रक्षालनं च तत् ॥ नाडीसञ्चारविज्ञानं प्रत्याहारनिरोधनम्॥१०॥ कुक्षिसंचालनं क्षिप्रं प्रवेश इन्द्रियाध्वना ॥ नाडीकर्मा- णि कल्याणि भोजनं श्रूयता॑मम ॥११॥ टीका-हे देवी ! हे वरानने ! अब ज्ञानरूप विघ्न कहते हैं