भारतकोश
शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

Shiva Samhita with Hindi Commentary

भगवान् शिव / पं. मिहिरचन्द्र द्वारा

DevanagariSanskritpublished216 पृष्ठ

पृष्ठ 176, कुल 216 में से

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(१७२) शिवसंहिता भाषाटीकासमेता। मूलम्-तालुमूले सुषुम्णास्य अधोवक्त्रा प्रव- . र्तते ॥ मूलाधारेण योन्यस्ताः सर्वनाड्यः समाश्रिताः ॥ ता बीजभूतास्तत्त्वस्य ब्र- ह्ममार्गप्रदायिकाः ॥ १६० ॥ टीका-वह सुषुम्णाका मुख तालुमूल अर्थात् ब्र- ह्मारन्ध्रमें नीचेको वर्तमान है और मूलाधारसे योनि पर्यंत जो सकल नाडी हैं वह इस तत्त्वज्ञानबीजस्वरूप ब्रह्ममार्गकी दाता सुषुम्णाके अधोवदनके अवलम्बसे स्थित हैं ॥ १६० ॥ मूलम्-तालुस्थाने च यत्पद्मं सहस्रारं पुरो- दितम्॥तत्कन्दे योनिरैकास्ति पश्चिमा- भिमुखी मता॥ १६१॥ तस्य मध्ये सुषु- म्णाया मूलं सविवरं स्थितम् ॥ ब्रह्मरन्ध्रं तदेवोक्तमामूलाधारपङ्कजम् ॥ १६२ ॥ टीका-तालुस्थानमें जो सहस्रदल कमल कहाग- या है उसके कन्दमें एक योनि पश्चिमाभिमुखी है अर्थात् पीछेको मुख है उस योनिके मध्यमें जो मूलविवर है उसमें सुषुम्णा ज्ञाननाडी स्थित है हे देवी ! इसको ब्रह्मरन्ध्र और इसीको मूलाधारपद्मभी कहते हैं ॥ १६१ ॥ १६२ ॥ मूलम्-तत्रांतरन्ध्रे चिच्छक्तिः सुषुम्णा कु-

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