भारतकोश
शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

Shiva Samhita with Hindi Commentary

भगवान् शिव / पं. मिहिरचन्द्र द्वारा

DevanagariSanskritpublished216 पृष्ठ

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( १८ ) शिवसंहिता भाषाटीकासमेता । मूलम्-यद्भूतं यच्च भाव्यं वै मूर्तामूर्त्तं तथैव च ॥ सर्वमेव जगदिदं विवृतं परमा- त्मनि ॥ ४९ ॥ टीका- जो भया है और जो होगा मूर्त्तिमान् वा अमूर्त्तिमान् यह सब जगत् आत्मासे मिलाहै अर्थात् उससे भिन्न नहीं है ॥ ४९ ॥ मूलम्-कल्पकैः कल्पिता विद्या मिथ्या जाता मृषात्मिका ॥ एतन्मूलं जगदिदं कथं सत्यं भविष्यति ॥ ५० ॥ टीका-यह संसार मिथ्याभूत अविद्याकल्पनासे कल्पित भया है बडे आश्चर्यकी बात है कि, जिसकी जड मिथ्या है वह आप कब सत्य होसक्ता है अर्थात् सब झूठ है ॥ ५० ॥ मूलं-चैतन्यात्सर्वमुत्पन्नं जगदेतच्चराच- रम् ॥ तस्मात्सर्वं परित्यज्य चैतन्यं त समाश्रयेत् ॥ ५१ ॥ टीका-केवल एक चैतन्य ब्रह्मसे जरायुज, अंडज, स्वेदज, उद्भिज्ज आदि सकल चराचर संसार उत्पन्न भया है इस हेतुस सबको त्यागिके केवल उसी एक