भारतकोश
शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

Shiva Samhita with Hindi Commentary

भगवान् शिव / पं. मिहिरचन्द्र द्वारा

DevanagariSanskritpublished216 पृष्ठ

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प्रथमपटलः । ( २७ ) संसार मनोराज्यवत् है. जैसे मनुष्यका मनोराज्य मि- थ्या है, उसी प्रकार आत्माका इच्छाभूत यह जगत्भी मिथ्याहै शुद्धब्रह्ममें ज्ञानरूपी विद्याका संबन्ध है ॥७५॥ मूलम्-ब्रह्मतेजोंऽशतो याति तत आभास ते नभः ॥ तस्मात्प्रकाशते वायुर्वायोर- ग्निस्ततो जलम् ॥ ७६ ॥ प्रकाशते ततः पृथ्वी कल्पनेयं स्थिता सति ॥ आकाशा- द्वायुराकाशपवनादग्निसंभवः ॥ ७७ ॥ टीका-उस ब्रह्मके तेजअंशसे आकाश उत्पन्नभया, आकाशसे वायु उत्पन्न भया, वायुसे अग्नि उत्पन्न भया अग्निसे जल भया, जलसे पृथ्बी उत्पन्न भई, यह कल्प- ना है आकाशसे वायु उत्पन्न भया और आकाश वायुसे तेज उत्पन्न भया ॥ ७६ ॥ ७७ ॥ मूलम्-खवाताग्नेर्जलं व्योमवाताग्निवारि तोमही ॥ खंशब्दलक्षणं वायुश्चंचलः स्प- र्शलक्षणः ॥ ७८ ॥ स्याद्रूपलक्षणं तेजः सलिलं रसलक्षणम् ॥ गन्धलक्षणिका पृथ्बी नान्यथा भवति ध्रुवम् ॥ ७९ ॥