भारतकोश
शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

Shiva Samhita with Hindi Commentary

भगवान् शिव / पं. मिहिरचन्द्र द्वारा

DevanagariSanskritpublished216 पृष्ठ

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पृष्ठ 59

तृतीयपटलः । (५५) मूलम्--प्राणस्य वृत्तिभेदेन नामानि विवि- धानि च ।। वर्तन्ते तानि सर्वाणि कथितुं नैव शक्यते ॥ ३ ॥ टीका--प्राणके वृत्तिभेदसे जो इस शरीरमें वायु व- र्तमान हैं उनके बहुतप्रकारके नाम हैं जिनके वर्णन करनेको हम शक्य नहीं हैं अर्थात् यहां उनके वर्णन का प्रयोजन नहीं है ॥ ३ ॥ मूलम्-प्राणोऽपानः समानश्चोदानो व्यान- श्च पञ्चमः ॥ नागः कूर्मश्चकृकरो देवदत्तो धनञ्जयः॥ ४ ॥दशनामानिमुख्यानि म- योक्तानीह शास्त्रके ।। कुर्वन्तित्तेऽत्रकार्या- णि प्रेरितानि स्वकर्मभिः ॥ ५ ॥ टीका--प्राणके मुख्य भेदोंका नाम प्राण, अपान, समान, उदान, पांचवां व्यान और नाग, कूर्म, कृकर, देवदत्त, धनञ्जय, यह दश वायु मुख्य हैं हम शास्त्रप्र- माणसे कहते हैं शरीरमें यह वायु अपने कर्मसे प्रेरित होके कार्य करते हैं ॥ ४ ॥ ५ ॥ मूलम्-अत्रापि वायवः पञ्च मुख्याः स्युर्द- शतः पुनः ॥ तत्रापि श्रेष्ठकर्त्तारौ प्राणा- पानौ मयोदितौ ॥ ६ ॥