भारतकोश
शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

Shiva Samhita with Hindi Commentary

भगवान् शिव / पं. मिहिरचन्द्र द्वारा

DevanagariSanskritpublished216 पृष्ठ

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(९२) शिवसंहिता भाषाटीकासमेता । वर्षी दिव्यकुलामृतको पान करके फिर योनिमंडल- में स्थित होजाताहै ॥ ४ ॥ ५ ॥ मूलम्-पुनरेव कुलं गच्छेन्मात्रायोगेन ना- न्यथा ॥ सा च प्राणसमाख्याता ह्यस्मि- स्तन्त्रे मयोदिता ॥ ६ ॥ टीका-फिर ब्रह्मयोनिसे प्राणायामयोग करके प्राण कुलमंडलमें जाताहै इस तंत्रमें जो हमने कहाहै हे देवी ! उस ब्रह्मयोनिको प्राणके समान कहते हैं ॥ ६ ॥ मूलम्-पुनः प्रलीयते तस्यां कालाग्न्यादि- शिवात्मकम् ॥ ७ ॥ योनिमुद्रा पराह्येषा बन्धस्तस्याः प्रकीर्तितः ॥ तस्यास्तु बन्धमात्रेण तन्नास्ति यन्न साधयेत् ॥ ८ ॥ टीका-फिर तीसरे बार काल अग्नि आदि शिवा- त्मक जीव प्रस्थानपूर्वकं चंद्रमण्डलमें दिव्य अमृत- पान करके फिर ब्रह्मयोनिमें लय होजाता है हे देवी ! इस बन्धको योनिमुद्रा कहते हैं केवल बन्धमात्रसे संसारमें असाध्य कोई वस्तु नहीं है अर्थात् सब सिद्ध होसक्ताहै ॥ ७ ॥ ८ ॥ मूलम्-छिन्नरूपास्तु ये मन्त्राः कीलिताः स्तंभिताश्च ये ॥ दग्धा मन्त्राः शिरोहीना