शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)
Shiva Samhita with Hindi Commentary
भगवान् शिव / पं. मिहिरचन्द्र द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंचतुर्थपटलः । (९३) मलिनास्तु तिरस्कृताः ॥ ९ ॥ मन्दा बा- लास्तथा वृद्धाः प्रौढा यौवनगर्विताः ॥ भे- दिनो भ्रमसंयुक्ताः सप्ताहं मूर्च्छिताश्च ये ॥ १० ॥ अरिपक्षे स्थिता ये च निर्वी- र्याः सत्त्ववर्जिताः॥ तथा सत्त्वेन हीनाश्च खण्डिताः शतधाकृताः ॥ ११ ॥ विधानेन च संयुक्ताः प्रभवन्त्याचिरेण तु ॥ सिद्धिमोक्षप्रदाः सर्वे गुरुणा वि- नियोजिताः ॥ १२ ॥ यद्यदुच्चरते योगी मंत्ररूपं शुभाशुभम्॥ तत्सिद्धिं समवाप्नो- ति योनिमुद्रानिबन्धनात् ॥ १३ ॥ दीक्ष- यित्वा विधानेन अभिषिच्य सहस्रधा ॥ ततो मंत्राधिकारार्थमेषा मुद्रा प्रकी- र्त्तिता ॥ १४ ॥
टीका-जो मन्त्र छिन्नरूप हैं और कीलित हैं स्तम्भि- त हैं और जो मन्त्र दग्ध हैं शिरहीन हैं मलीन हैं और जिनका अनादर है और मन्द हैं बाल हैं वृद्ध हैं प्रौढ हैं और जो यौवनगर्वित हैं और भेदित हैं भ्रमसंयुक्त हैं सप्ताहसे मूर्च्छित हैं और जो शत्रुके पक्षमें हैं निर्वीर्य हैं